Sambhaji Maharaj History in Hindi – संभाजी महाराज इतिहास

Sambhaji Maharaj History in Hindi

भारत के इतिहास में कई वीर हस्तियों ने अपना नाम अमर कर के गया है। उन्हीं में से एक है मराठा साम्राज्य के दूसरे छत्रपति संभाजी महाराज जी। शिवाजी के पुत्र के रूप में विख्यात संभाजी महाराज का जीवन भी अपने पिता छत्रपति शिवाजी महाराज के समान ही देश और हिंदुत्व को समर्पित रहा है।

संभाजी जी ने अपने बाल्यकाल से ही राज्य की राजनीति समस्याओं का निवारण करते थे। और इन दोनों में मिले संघर्ष एवं शिक्षा दीक्षा के कारण ही बाल शंभू जी राजे कालांतर में वीर संभाजी राजे बन सके थे।

लेख को शुरू करने से पहले आइए, मराठा साम्राज्य के बारे में कुछ जानकारी प्राप्त कर लेते हैं, जिसका उत्तराधिकारी थे छत्रपति संभाजी राजे।

Sambhaji Maharaj History in Hindi

एक भारतीय साम्राज्यवादी शक्ति थी जो 1674 से 1818 तक अस्तित्व में रहा ,मराठा साम्राज्य की स्थापना छत्रपति शिवाजी ने 1674 में डाली और तभी से इस साम्राज्य की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कई वर्ष औरंगजेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। बाद में आए पेशावरओने ईसे उत्तर भारत तक बढ़ाया, यह साम्राज्य 1818 तक चला, और लगभग पूरे भारत में फैल गया।

इसी साम्राज्य के दूसरे छत्रपति का नाम संभाजी था जोकि शिवाजी के पुत्र थे। तो आइए आव जानते हैं छत्रपति संभाजी मराठा का जीवन परिचय के बारे में।

Chatrapati Sambhaji Maharaj

संभाजी महाराज का जन्म 14 मई, 1657 में पुरंदर किले पर हुआ था। 2 साल की उम्र में ही उनकी मां की देहांत हो गई थी। फिर उनकी देखभाल उनकी दादी यानी जीजा बाई ने किया था। संभाजी महाराज बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति थे। वे केवल 13 साल की उम्र में ही तेरा भाषाएं सीख गए थे। कहीं शास्त्र भी लिख डाले थे, घुड़सवारी, तीरंदाजी, तलवारबाजी, यह सब तो मानों जैसे इनके बाएं हाथ का खेल था। छत्रपति संभाजी 9 वर्ष की अवस्था में पुण्यश्लोक छत्रपति श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रसिद्ध आगरा यात्रा में भी वे साथ में गए थे।

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औरंगजेब के बंदी गृह से निकल कर, पुण्यश्लोक छत्रपति श्री छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र वापस लौटने पर मुगलों से समझौते के फलस्वरूप, संभाजी मुगल सम्राट द्वारा राजा के पद तथा पंच हजारी म`सब से विभूषित हुए। उनको यह नौकरी मान्य नहीं थी। किंतु हिंदूवादी स्वराज्य स्थापना की शुरू के दिन होने के कारण और पिता पुण्यश्लोक छत्रपति श्री शिवाजी महाराज के आदेश के पालन हेतु केवल 9 साल के उम्र में ही इतना जिम्मेदारी और अपमानजनक कार्य उन्होंने धीरज से किया था।

संभाजी महाराज द्वारा लिखी रचनाएं :

कलश के संपर्क और मार्गदर्शन से संभाजी की साहित्य के तरफ रूचि बढ़ने लगी। उन्होंने अपने केवल 14 साल के उम्र में ही बुधभूषणम, नक्शीखांत, नायिका भेद, सात शतक यह तीन संस्कृत ग्रंथ लिखे थे। संभाजी महाराज संस्कृत के महान ज्ञानी थे।

छत्रपति श्री शिवाजी महाराज एक राजतंत्र :

पराक्रमी होने के बावजूद भी उन्हें अनेक लड़ाईऔ से दूर रखा गया था। स्वभावत: संवेदनशील रहने वाले संभाजी राजे उनके पिता शिवाजी महाराज जी के आज्ञा अनुसार मुगलों को जा मिले, ताकि वे उन्हें गुमराह कर सकें। क्योंकि उसी समय मराठा सेना दक्षिण दिशा के दिग्विजय से लौटी थी, और उन्हें फिर से जोश में आने के लिए समय चाहिए था।

इसलिए मुगलों को गुमराह करने के लिए पुण्यश्लोक छत्रपति श्री शिवाजी महाराज जी ने ही उन्हें भेजा था एवं वह एक राजतंत्र था! बाद में छत्रपति श्री शिवाजी महाराज जी ने ही उन्हें मुगलों से मुक्त किया था।

संभाजी की कवि कलश से मित्रता :

बचपन में संभाजी जब मुगल शासक औरंगजेब की कैद से बच कर भागे थे, तब वह अज्ञातवास के दौरान शिवाजी के दूर के मंत्री रघुनाथ कोर्ट के दूर के रिश्तेदार के यहां कुछ समय के लिए रुके थे। वहां संभाजी लगभग 1 से डेढ़ वर्ष तक के लिए रुके थे, तब संभाजी ने कुछ समय के लिए ब्राह्मण बालक के रूप में जीवनयापन किया था। इसके लिए मथुरा में उनका उपनयन संस्कार भी किया गया और उन्हें संस्कृति भी सिखाई गई। इसी दौरान संभाजी का परिचय कवि कलश से हुआ। संभाजी का उग्र और विद्रोही स्वभाव को सिर्फ कभी कलश ही संभाल सकते थे।

Sambhaji Maharaj History in Hindi

राज्याभिषेक :

छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु के बाद, एक शोक पर्वत उन पर एवं स्वराज पर टूट पड़ा था। लेकिन इस स्थिति में संभाजी महाराज ने स्वराज्य की जिम्मेदारी संभाली। कुछ लोगों ने धर्म वीर छत्रपति श्री संभाजी महाराज के अनुज राजा राम को सिंहासन आसीन करने का प्रयत्न किया था। किंतु सेनापति हं वीर राव मोहिते के रहते यह कारस्थान नाकामयाब हुआ।

16 जनवरी 1681 को संभाजी महाराज का विधिवत राज्याभिषेक हुआ। उन्होंने अन्नाजी दत्तो और मोरोपंत पेशवा को उदार हृदय से क्षमा कर दिया एवं उन्हें अष्टप्रधान मंडल में रखा। हालांकि कुछ समय बाद, अन्नाजी दत्तो और मंत्रियों ने हीं फिर से संभाजी राजे के खिलाफ साजिश रची और राजा राम का राज्याभिषेक की योजना किया गया था। संभाजी राजे ने स्वराज्य द्रोही अन्नाजी दत्तो और उनके सहयोगी यों को हाथी के पांव के नीचे मार डाला।

संभाजी पर औरंगजेब का अत्याचार :

1689 तक स्थितियां बदल चुकी थी। मराठा राज्य संगमेश्वर मैं शत्रुओं के आगमन से अनभिज्ञ था। ऐसे में मुकर्रम खान के अचानक आक्रमण से मुगल सेना महल तक पहुंच गई, और संभाजी के साथ कवि कलश को भी बंदी बना लिया। एवं उन दोनों को कारागार में डाला गया, और उन्हें वेद विरुद्ध इस्लाम अपनाने को विवश किया गया।

औरंगजेब के शासनकाल के अधिकारिक इतिहासकार मसीर प्रथम अंबारी और कुछ मराठा शत्रुओं के अनुसार दोनों को चैन से जकड़ कर हाथी के होदे से बांधकर औरंगजेब के कैंप तक ले जाया जाता था जोकि अकलुज में था। उसके बाद वहां उन दोनों को तहखाने में भी डालने की आदेश दिया गया था। इतने यातना ओ के बाद भी हार ना मानने पर संभाजी और कलश को कैद से निकाल कर उन दोनों को घंटी वाली टोपी पहना दी गई एवं उनका काफी अपमान भी किया गया था।

औरंगजेब ने कहा कि अगर वह अपना धर्म परिवर्तन कर लेते हैं तो संभाजी और उनके मित्रों को माफी मिल जाएगी। संभाजी इस बातों से साफ इनकार कर दिया। फिर संभाजी ने अपने ईश्वर को याद किया और कहने लगे कि धर्म के भेद को समझने के बाद वह अपना जीवन बार बार और हर बार राष्ट्र को समर्पित करने को तत्पर है। अर्थात संभाजी औरंगजेब से बिल्कुल हार नहीं माने।

इन सब के उपरांत औरंगजेब ने क्रोधित होकर संभाजी के घाव पर नमक छिड़काया और उन पर बहुत अत्याचार भी किए। परंतु संभाजी ने बिल्कुल भी औरंगजेब के आगे सर नहीं झुकाया। संभाजी को रोज इसी प्रकार प्रताड़ित किया जाता था। 11 मार्च 1989 को उनका सर धड़ से अलग कर दिया गया था और इस प्रकार उनकी मृत्यु हुई थी।

छत्रपति संभाजी महाराज की कुछ सरल जानकारियां ( Sambhaji Maharaj History in Hindi )

नाम संभाजी
उपनाम छबा और संभाजी राजे
जन्मदिन 14 मई 1657
जन्म स्थान पुरंदर के किले में
माता- पिता सई बाई – छत्रपति शिवाजी
दादा – दादी  शाहजी भोंसले – जीजाबाई
भाई – बहन सकू बाई, अंबिका बाई , रनु बाई, जाधव , दीपा बाई, कमलाबाई, पलकर , सिरके
पत्नी येसूबाई
मित्र और सलाहकार कवि कलश
कौशल संस्कृत में ज्ञाता, कला प्रेमी और वीर योद्धा
युद्ध 1669 में वाई का युद्ध
शत्रु औरंगजेब
मृत्यु 11 मार्च 1689
आराध्य देव महादेव
मृत्यु का कारण औरंगजेब की दी गई यातना नहीं मानने के कारण

 

विवाद : अपने परिवार में पिता जी शिवाजी से विवाद होने पर नजरबंद किया और वहां से भाग निकले और मुगलों में जाकर शामिल हो गए और इस्लाम अपना लिया लेकिन मुगलों के अत्याचार को देख कर पुण लौट आए। पारिवारिक राजनीति का शिकार हुए।

उपलब्धियां : औरंगजेब के सामने कभी घुटने नहीं टेके, अंतिम सांस तक योद्धा की भांति डटे रहे।

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Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi – डॉ राजेंद्र प्रसाद पर निबंध

Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi

डॉ राजेंद्र प्रसाद वह व्यक्ति थे, जीने की सादगी और सरलता किसी को भी प्रभावित कर देती थी। इन्हें आदर और सम्मान के साथ राजेंद्र बाबू भी कहा जाता है। स्वाधीन भारत के सर्वप्रथम राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए भी अहंकार से पूरी तरह मुकर रहने वाले और किसान जैसी वेशभूषा में रहने वाले व्यक्ति थे हमारे राजेंद्र बाबू।

राष्ट्रपति के सूची में पहला नाम डॉ राजेंद्र प्रसाद का ही आता है। जो भारतीय संविधान के आर्किटेक्ट और आजाद भारत के पहले राष्ट्रपति भी थे। वह महात्मा गांधी के काफी करीबी सहयोगी भी थे। इसी वजह से वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में भी शामिल हो गए थे और बाद में बिहार क्षेत्र के प्रसिद्ध नेता बने। नमक सत्याग्रह के भी वह सक्रिय नेता थे। भारत छोड़ो आंदोलन में भी उन्होंने भाग लिया था एवं ब्रिटिश अधिकारियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।

About Dr Rajendra Prasad in Hindi (डॉ राजेंद्र प्रसाद के जीवन परिचय )

पूरा नाम डॉ राजेंद्र प्रसाद
धर्म हिंदू
जन्म 3 दिसंबर 1884
जन्म स्थान बिहार (जीरादेई)
माता- पिता कमलेश्वरी देवी – महादेव सहाय
शिक्षा 1907 मैं कोलकाता विश्वविद्यालय से M.A., 1910 में बैचलर ऑफ ल उत्तीर्ण , 1915 में मास्टर ऑफ लॉ पूरा किया था ।
विवाह राजवंशी देवी (1896 )
मृत्यु 28 फरवरी, 1963 पटना बिहार

Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi

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Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi in 200 Words

डॉ राजेंद्र प्रसाद भारतीय लोकतंत्र के पहले राष्ट्रपति थे। साथ ही एक भारतीय राजनीति के सफल नेता, और प्रशिक्षक वकील भी थे। भारतीय स्वतंत्रता अभियान के दौरान वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और बिहार क्षेत्र से वह एक बड़े नेता साबित हुए थे। महात्मा गांधी के सहायक होने की वजह से प्रसाद को ब्रिटिश अथॉरिटी ने 1931 के नमक सत्याग्रह और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में जेल में भी डाला गया था।

राजेंद्र प्रसाद ने 1934 से 1935 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रूप में भारत की सेवा की। और 1946 के चुनाव में सेंट्रल गवर्नमेंट की फूड एंड एग्रीकल्चर मंत्री के रूप में सेवा की। 1947 में आजादी के बाद प्रसाद को संगठक सभा में राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया गया था। 1950 में भारत जब स्वतंत्र गणतंत्र बना, तब अधिकारिक रूप से संगठक सभा द्वारा भारत का पहला राष्ट्रपति चुना गया। इसी तरह 1951 के चुनाव में समिति द्वारा चुनाव निर्वाचन समिति द्वारा उन्हें वहां का अध्यक्ष चुना गया।

राष्ट्रपति बनते ही प्रसाद ने कई सामाजिक भलाई के काम किए, कई सरकारी दफ्तरों की भी स्थापना की और उसी समय उन्होंने कांग्रेस पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया। राज्य सरकार के मुख्य होने के कारण उन्होंने कई राज्य में पढ़ाई का विकास किया कई पढ़ाई करने की संस्थाओं का निर्माण भी किया और शिक्षण क्षेत्र के विकास पर ज्यादा ध्यान देने लगे।

उनके इसी तरह के विकास भरे काम को देख कर 1957 के चुनावों में चुनाव समिति द्वारा उन्हें फिर से राष्ट्रपति घोषित किया गया और वे अकेले ऐसे व्यक्ति बने, जिन्हें लगातार दो बार भारत का राष्ट्रपति चुना गया था।

Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi in 700 Words

डॉ राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के एक छोटे से जीरादेई में हुआ था। इनके पिता का नाम महादेव सहाय था, एवं माता का नाम कमलेश्वरी देवी थी। इनके पिता संस्कृत व फारसी भाषा के बहुत बड़े ज्ञानी थे। जबकि माता एक धार्मिक महिला थी, वे राजेंद्र प्रसाद को रामायण की कहानियां भी सुनाया करती थी। डॉ प्रसाद का 12 साल की उम्र में ही बाल विवाह हो गया था। उनकी पत्नी का नाम राजवंशी देवी थी।

प्रसाद की शिक्षा की अगर बात किया जाए तो 5 साल की उम्र में ही प्रसाद के माता पिता उनको एक मौलवी के यहां भेजते थे, ताकि वह फारसी, उर्दू, हिंदी भाषा का ज्ञान प्राप्त कर सकें। डॉ राजेंद्र प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा उन्हीं के गांव जीरादेई में हुआ था। पढ़ाई की तरफ इनका ज्ञान बचपन से ही था। अपने भाई महेंद्र प्रताप के 7 वे पटना के पीके घोष अकैडमी में जाने लगे।

इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ कोलकाता में प्रवेश के लिए परीक्षा दी, जिसमें वह बहुत अच्छे नंबर से पास हुए, जिसके बाद उन्हें हर महीने ₹30 की स्कॉलरशिप भी मिलने लगी। उनके गांव से पहली बार किसी युवक ने कोलकाता विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने में सफलता प्राप्त की थी। जो निश्चित रूप से राजेंद्र प्रसाद और उनके परिवार के लिए बड़ी ही गर्व की बात थी।

Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi

1902 में प्रसाद जी ने प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिल लिया, जहां से उन्होंने संपादक किया। 1907 मैं यूनिवर्सिटी आफ कोलकाता से इकोनॉमिक्स में M.A. किया। सन 1915 में कानून के मास्टर की डिग्री पूरी की जिसके लिए उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था। इसके बाद उन्होंने कानून में डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त कर ली। इसके बाद पटना आकर वकालत करने लगे जिससे इन्हें बहुत धन और नाम मिला।

उन्होंने अपने आप को सादगी, सेवा, त्याग, देश भक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन में पूरी तरह से नियोजित कर दिया था। डॉ राजेंद्र बाबू अत्यंत सरल और गंभीर प्रकृति के व्यक्ति थे। वे सभी वर्ग के लोगों से समान रूप से व्यवहार रखते थे।

राजनीति की अगर बात किया जाए तो- बिहार में अंग्रेज सरकार के नील खेती के लिए सरकार अपने मजदूरों को उचित वेतन नहीं देते थे। तब 1917 में गांधी जी ने बिहार आकर इस समस्या को दूर करने की पहल की, उसी दौरान डॉ प्रसाद गांधीजी से मिले। उनकी विचारधारा से वे बहुत प्रभावित हुए। 1919 में पूरे भारत में सभी नए आंदोलन की लहर थी। गांधी जी ने सभी स्कूल, सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करने की अपील की ! जिसके बाद डॉक्टर प्रसाद ने अपनी नौकरी छोड़ दिए थे।

चंपारण आंदोलन के दौरान राजेंद्र प्रसाद गांधी जी के वफादार साथी बन गए थे। गांधी जी के प्रभाव में आने के बाद उन्होंने अपने पुराने और रूढ़िवादी विचारधारा का त्याग कर दिया था ! और एक नई ऊर्जा के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। 1931 में कांग्रेस ने आंदोलन छेड़ दिया था। इस दौरान डॉ प्रसाद को कई बार जेल जाना पड़ा। 1934 में उनको मुंबई कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। उन्हें एक से अधिक बार अध्यक्ष बनाएं गए। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में इन्होंने भाग लिया। जिस दौरान वे गिरफ्तार हुए और उन्हें नजर बंद करके रखा गया था।

Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi

भले ही 15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। लेकिन संविधान सभा का गठन उससे कुछ समय पहले ही कर लिया गया था। संविधान निर्माण में भीमराव अंबेडकर व राजेंद्र प्रसाद ने मुख्य भूमिका निभाई थी। भारतीय संविधान समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ प्रसाद को चुना गया था। संविधान पर हस्ताक्षर करके डॉ प्रसाद ने ही इसे मान्यता दी थी।

26 जनवरी 1950 को भारत के लोगों को डॉ राजेंद्र प्रसाद के रूप में प्रथम राष्ट्रपति मिल गया। 1959 में फिर राष्ट्रपति चुनाव हुई। एवं यह पहली वह आखरी बार था जब एक ही इंसान दो बार लगातार राष्ट्रपति बना था। 1962 तक वे सर्वोच्च पद पर विराजमान रहे। 1962 में वे अपने पद को त्याग कर पटना चले गए और बिहार विद्यापीठ में रहकर जन सेवा करके अपना जीवन व्यतीत करने लगे।

सन 1962 में अपने राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ सम्मान ” भारत रत्न ” से नवाजा गया था। वेद विद्वान, प्रभावशाली, द्रड़ निश्चय और उदार दृष्टिकोण वाले व्यक्ति थे।

28 फरवरी, 1963 को डॉ प्रसाद का निधन हो गया। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसी घटनाएं है जो यह प्रमाणित करती है कि राजेंद्र प्रसाद बेहद दयालु और निर्मल स्वभाव के व्यक्ति थे। भारतीय राजनीतिक इतिहास में उनकी छवि एक महान और विनम्र राष्ट्रपति की है। पटना में प्रसाद जी की याद में ” राजेंद्र स्मृति संग्रहालय” का निर्माण कराया गया।

Short Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi

1) 1906 मैं ‘ बिहारी क्लब ‘ जो राजेंद्र बाबू के पहले से स्थापना किया गया था, उनके सचिव बने थे वह।

2) 1908 मैं राजेंद्र बाबू ने मुजफ्फरपुर के ब्राह्मण कॉलेज में अंग्रेजी विषय के अध्यापक की नौकरी मिली और कुछ समय वह उस कॉलेज के अध्यापक के पद पर रहे।

3) 1909 कोलकाता सिटी कॉलेज में अर्थशास्त्र विषय का उन्होंने अध्यापन किया।

4) 1911 मैं राजेंद्र बाबू ने कोलकाता उच्च न्यायालय में वकील का व्यवसाय शुरू किया था।

5) 1914 में बिहार और बंगाल इन दो राज्य में बाढ़ के वजह से हजारों लोगों को बेघर होने की नौबत आई थी। तब राजेंद्र बाबू ने दिन रात एक कर के बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद की थी।

6) 1916 में उन्होंने पटना उच्च न्यायालय में वकील का व्यवसाय शुरू किया था।

7) 1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में भी वह शामिल हुई। इसी साल में उन्होंने ‘देश’ नाम का हिंदी भाषा में साप्ताहिक निकाला था।

8) 1921 में राजेंद्र बाबू ने बिहार विश्वविद्यालय की स्थापना की।

9) 1928 में हालैंड में ” विश्व युवा शांति परिषद ” हुई उसमें राजेंद्र बाबू ने भारत की ओर से हिस्सा लिया और भाषण भी दिया था।

10) स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति होने का सम्मान राजेंद्र बाबू को मिला।

11) 1950 से 1962 ऐसे ही 12 साल तक उनके पास राष्ट्रपति पद रहा। बाद में बाकी का जीवन उन्होंने स्थापना किए हुए पटना के सदाकत आश्रम में ही गुजारा।

डॉ राजेंद्र प्रसाद में भारत का विकास करने की चाहत थी। वे लगातार भारतीय कानूनों व्यवस्था को बदलते रहे, और अपने सहकर्मियों के साथ मिलकर उसे और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास करने लगे। इसी तरह हम भी भारत के ही निवासी है हमारा भी कर्तव्य बनती है कि हम भी हमारे देश के लिए एवं हमारे देश के विकास में सरकार की मदद करें। ताकि दुनिया की नजरों में हम भारत का दर्जा ऊंचा कर सके।

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Short Essay on Raksha Bandhan in Hindi – रक्षा बंधन पर निबंध

Essay on Raksha Bandhan in Hindi

इस निबंध में, आपके लिए रक्षाबंधन के पर्व पर हिंदी में एक निबंध बना कर दिया गया है। राखी को भाई – बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है।

रक्षाबंधन भाई बहनों का वह त्यौहार है जो मुख्यतः हिंदुओं में प्रचलित है। एवं इस त्यौहार को भारत के सभी धर्म के लोग समान उत्साह और भाव से मनाते हैं। पूरे भारत में इस दिन के माहौल देखने लायक होता है। और हो भी क्यों ना, यही तो एक ऐसा विशेष दिन है जो भाई- बहनों के लिए बना है।

Essay on Raksha Bandhan in Hindi

भारत में सभी त्यौहार बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता हैं। वैसे ही सावन मास के पूर्णिमा तिथि में मनाया जाने वाला रक्षाबंधन जिसे भाई बहन का त्योहार और उनके प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसे भी बड़ी ही उत्साह से भारत में मनाया जाता है।

इस दिन बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की दुआ करती है और भाई अपनी बहन को रक्षा करने का वचन देते हैं। सभी लोग राखी के त्यौहार को बड़ी खुशी के साथ मनाते हैं। उस दिन भाई अपने बहन को तोहफे भी देते हैं। इस दिन बांधी जाने वाली राखी रेशम के धागे, चांदी, और सोने की होती है। लोग घरों के बाहर राम सीता, राधेश्याम की पर्ची भी लगाते हैं।

घर में तरह-तरह के व्यंजन भी बनाए जाते हैं। उस दिन सरकार महिलाओं के लिए यातायात की सुविधा भी मुफ्त में उपलब्ध कराते हैं। शादीशुदा महिला अपने मायके जाकर अपनी भाइयों को राखी बांधती है।

Essay on Raksha Bandhan in Hindi

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Essay on Raksha Bandhan in Hindi in 300 Words

“रक्षाबंधन” हिंदुओं का बड़ा पवित्र त्यौहार है। यह सावन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसका अर्थ है रक्षा के लिए बांधना। इस अवसर पर बहने अपने भाइयों की कलाइयों पर धागा बांधती है। दूसरे शब्दों में वे अपने भाइयों से बचन लेती है कि वह सदैव उनकी रक्षा करेंगे।

प्राचीन काल में रक्षाबंधन के रूप में मौली का धागा ही पर्याप्त था। लेकिन आजकल नई नई किसम चमकीली, भड़कीले एवं मनमोहक राखिया बाजार में बिकने लग गई है। इन राखियों को देखते ही लड़कियां कीमती से कीमती राखी खरीद कर भाई की कलाई में बांधने की होर में लग जाती है। इस त्यौहार से लगभग 1 सप्ताह पूर्व से ही बाजारों मैं दुकानों पर राखिया ही राखिया दिखाई देती है। राखियां बनाने वाले भी नित्य नए किशम की राखियां बनाकर अपने व्यापार में वृद्धि करते हैं।

इस उत्सव पर बहने बड़े ही चाव से राखिया खरीदती है। बहुत सी विवाहित लड़कियां तो अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए लंबी यात्रा करके अपने मायके जाती है। लेकिन कुछ बहने डाक द्वारा ही राखी भेजकर खुद के मन को संतोष कर लेती है। बच्चे, बूढ़े, जवान सभी इस त्योहार को बड़े चाव से बनाते हैं। वे भाइयों की कलाई में राखी बांधकर उनके मस्तक पर तिलक लगाकर और मिठाई तथा फल भेट करके रक्षाबंधन को पालन करते हैं। भाई आशीर्वाद के रूप में बहनों को कुछ रुपए उपहार के तौर पर देते हैं।

Essay on Raksha Bandhan in Hindi

इस अवसर पर छोटे छोटे बच्चों की तो शोभा ही निराली होती है। वह अपने हाथों पर कई कई प्रकार के राखिया बांधकर घूमते हुए बड़े ही प्यारे लगते हैं। यह उत्सव उन बहनों को दुख: देते हैं जिनकी भाई नहीं होता है। ऐसे लड़कियां अपने रिश्ते के भाइयों को या अड़ोस पड़ोस में मुंह बोले भाइयों को राखी बांधकर संतोष कर लेते हैं।

इस त्योहार का बड़ा महत्व है। इतिहास बताते हैं कि राजस्थान की रानी कर्णावती ने एक मुस्लिम राजा हुमायूं को राखी भेजकर उन्हें रक्षा करने के लिए प्रार्थना की थी। हुमायूं ने अपने मंत्रियों के विरोध हो कर किसी की भी चिंता ना करके राखी भेजने वाली अपनी बहन कर्णावती की रक्षा करने का निश्चय लिया था। लेकिन दुख की बात यह है कि हम आज इस राखी में छिपी भावनाओं को भूल चुके हैं। हमें राखी के त्यौहार की पवित्रता को ध्यान में रखना चाहिए तथा आजीवन बहन की रक्षा का प्रण लेना चाहिए। राखी का महत्व उसकी सुंदरता में नहीं बल्कि उन धागों में छिपी प्राचीन परंपरा एवं भाई बहन के प्यार की पवित्र भावना में है।

Essay on Raksha Bandhan in Hindi in 500 Words

भारत त्योहारों का देश है। यहां विभिन्न प्रकार के त्योहार मनाए जाते हैं। हर त्योहार अपना विशेष महत्व रखता है। रक्षाबंधन भाई बहन के प्रेम का प्रतीक त्यौहार है। यह भारत की गुरु शिष्य परंपरा का प्रतीक त्यौहार भी है। यह दान के महत्व को प्रतिष्ठित करने वाला पावन त्यौहार है।

रक्षाबंधन के त्यौहार को श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। सावन मास मैं ऋषि गण आश्रम में रहकर अध्ययन और यज्ञ करते थे। सावन पूर्णिमा को मासिक यज्ञ की पूर्णाहुति के लिए होती थी। यज्ञ की समाप्ति पर यजमान और शिष्य को रक्षा सूत्र बांधने की प्रथा थी। इसीलिए इसका नाम रक्षाबंधन प्रचलित हुआ था। इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए ब्राम्हण आज भी अपने अनुमानों को रक्षा सूत्र बांधते हैं ! बाद में इसी रक्षा सूत्र को ही राखी कहा जाने लगा।

आज कल राखी को प्रमुख रूप से भाई बहन का पर्व माना जाता है। बहन तो महीनों पूर्व से ही इस पर्व की प्रतीक्षा करती रहती है। तब परिवार में सुख का दृश्य बना होता है। बड़े एवं बच्चे सभी के हाथों में रक्षा सूत्र बांधते हैं। घर में विशेष रूप से पकवानए भी बनाए जाते हैं।

Essay on Raksha Bandhan in Hindi

रक्षाबंधन के अवसर पर बाजार में विशेष रूप से चहल-पहल होती है। रंग-बिरंगी राखियों से दुकानों की रौनक बढ़ जाती है। लोग तरह-तरह की राखी खरीदते हैं। हलवाई की दुकान पर बहुत भीड़ होती है। लोग उपहार देने तथा घर में प्रयोग के लिए मिठाइयों के पैकेट खरीद कर ले जाते हैं। सावन पूर्णिमा के दिन मंदिरों में भी विशेष पूजा अर्चना की जाती है। लोग गंगा जल लेकर मिलो चलते हुए शिवजी को जल चढ़ाने के लिए जाते हैं। कंधे पर कावड़ लेकर चलने का दृश्य बड़ा ही अनुपम होता है। इस यात्रा में बहुत ही आनंद आता है।

कई तीर्थ स्थलों पर श्रावणी मेला भी लगता है। घर में पूजा पाठ और हवन के कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है। रक्षाबंधन के दिन दान का भी विशेष महत्व माना गया है। इससे प्रभुत पुण्य की प्राप्ति होती है, ऐसा ही कहा जाता है। पंडित पुरोहित को भोजन कराया जाता है तथा दान दक्षिणा भी दी जाती है।

Information About Raksha Bandhan in Hindi

रक्षाबंधन का ऐतिहासिक उल्लेख हिंदू पुराणों एवं कथाओं में भी है। जैसे वामन अवतार नामक पौराणिक कथाओं में रक्षाबंधन का प्रयोग मिलता है। कथा इस प्रकार के हैं – राजा बलि ने यज्ञ संपन्न कर स्वर्ग पर अधिकार का प्रयत्न किया था, तो देवराज इंद्र ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की, एवं विष्णु जी ब्राम्हण बनकर राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए। तथा भीक्षा में उन्होंने अपने तीन पग देने की स्थान मांगी। गुरु के मना करने पर भी बली ने तीन पग भूमि दान कर दी।

बामन भगवान ने 3 पग में आकाश पाताल और धरती नाप कर राजा बलि को रसातल में भेज दिया। उसने अपनी भक्ति के बल पर विष्णु जी से हर समय अपने सामने रहने का वचन ले लिया। तभी लक्ष्मी जी इस बात पर चिंतित हो गए। नारद जी की सलाह पर लक्ष्मी जी बलि के पास गई और रक्षा सूत्र बांधकर उसे अपना भाई बना लिया। बदले में वे विष्णु जी को अपने साथ ले आए। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। इसी प्रकार के इतिहास में राखी के अनेक महत्व के उल्लेख मिलते हैं।

रक्षाबंधन मानबियो भावों का बंधन है। यह प्रेम, त्याग और कर्तव्य का बंधन है। इस बंधन में एक बार भी बंद जाने पर इसे तोड़ना बड़ा ही कठिन होता है ! इस धागों में इतनी शक्ति है, जितनी लोहे की जंजीर में भी नहीं है। जिस प्रकार हुमायूं ने इसी धागे से बंधे होने के कारण बहादुर शास्त्री लड़ाई की थी ठीक उसी प्रकार इस दिन हर भाई को यह प्रतिज्ञा करनी चाहिए कि वह अपने प्राणों की बाजी लगा कर भी बहनों की रक्षा करेगा। यही रक्षाबंधन पर्व का महान संदेश है।

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Essay on Dog in Hindi – कुत्ता पर निबंध

Essay on Dog in Hindi

कुत्ता एक पालतू जानवर है। यह सारी जिंदगी मनुष्य के साथ वफादारी से निभाता है। इसकी चार टांगे होती है। इसके दांत बड़े हैं नुकीले होते हैं। और इसके सुनने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है, यह दूर से भी हल्की सी आहट को सुन लेते हैं। इनकी चमकदार आंखें होती है , एवं इसकी दांत बहुत नुकीले होने के कारण इन्हीं दांतो से किसी भी चीज को आसानी से चीर फाड़ कर सकते हैं। तो चलिए कुत्ते के बारे में अब हम विस्तार से जान लेते हैं।

About Dog in Hindi ( Essay on Dog in Hindi in 100 Words )

कुत्ता एक पालतू जानवर होता है। कुत्ते को स्तनधारियों की श्रेणी में रखा गया है, क्यों कि यह बच्चों को जन्म देता है और अन्य स्तनधारियों की तरह ही अपना स्तन पान कराते हैं।

कुत्ते की वैज्ञानिक नाम के नीसलुपस फैमिलिरीस है। मूल रूप से कुत्ते भेड़ियों की प्रजाति से ही उत्पन्न हुई है। कुत्तों की डीएनए 99 प्रतिशत उनसे मिलती है। ऐसा माना जाता है कि मानव द्वारा ही कुत्तों को सबसे पहले पालतू जानवर बनाया गया था। कुत्तों की बहुत सी नस्ल होती है। जीने मनुष्य द्वारा पालतू पशु के रूप में प्रयोग किया जाता है। इनका स्वभाव बहुत ही मददगार होता है और इसे मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र भी माना जाता है।

यह मानव के लिए बहुत साल पहले ही वफादार साबित हो चुके हैं ! यह मनुष्य के बोलने की तरीके को और स्वाभाव को अच्छी तरह से समझते हैं। कुत्ते बिस्कुट, मांस, सब्जियां, दूध, और अन्य तैयारी भोजन जो विशेष रूप से कुत्तों के लिए तैयार किया जाता है, वह सब खा सकते हैं। य बहुत अच्छे से अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, इसी कारण से ही कुत्तों को फायर डॉग, पुलिस डॉग, सहायक डॉग, सेना के कुत्ते, शिकारी कुत्ते, दूत कुत्ते, बचाव कुत्ते, चरवाहा कुत्ते, आदि के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं।

Essay on Dog in Hindi

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Information About Dog in Hindi ( Essay on Dog in Hindi in 300 Words )

अन्य पालतू पशुओं की भांति कुत्ता भी एक पालतू पशु है। कुत्तों को बढ़ा स्वामी भक्त भी माना जाता है। यह बहुत उपयोगी जानवर है ! कुत्ते की अनेक प्रजातियां पाई जाती है। कुछ कुत्ते बहुत समझदार होते हैं, कुत्ते की सुनने की शक्ति बड़ी ही तीव्र होती है। इसीलिए पुलिस अपराधियों को पकड़ने में कुत्तों की सहायता लेती है। कुत्ता एक चौपाया पशु है। इसकी दो आंखें, दो कान और एक पूंछ होता है। कुत्ते कई रंग के होते हैं। इसका आकार भी भिन्न-भिन्न होता है। कुछ तो खरगोश जैसे छोटे-छोटे और कुछ बकरी जैसी बड़ी बड़ी होती है।

रईस लोग तो घर की रखवाली के लिए कुत्तों को पालते हैं। दरवाजे की घंटी बजते ही कुत्ता सावधान हो जाता है और अजनबी आदमी को देखकर भोकने लगता है। रात में किसी चोर की आहट पाकर भोंकते ही पड़ोसी सब सावधान हो जाते हैं एवं इस वजह से चोर भागने पर मजबूर हो जाता है। या तो कभी कभी चोरों को पकड़ लिया भी जाता है।

Essay on Dog in Hindi

घर के पालतू कुत्तों की तो उनके मालिक देखभाल रखते हैं, उन्हें जंजीरों में बांधकर रखा जाता है। समय पर उन्हें नहलाते है और खिलाते हैं। वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो गलियों में आवारा घूमने वाले कुत्तों की एक बड़ी संख्या पाया जाता है। यह कुत्ते आहार की तलाश में दर-दर भटकते है। उन्हें कहीं टुकड़ा दिया जाता है तो कहीं से मार कर भगा दिया जाता है।

यह कुत्ते सर्दी गर्मी और बरसात में मारे- मारे फिरते हैं। कभी कभी कॉमेटी वाले ऐसे कुत्तों को पकड़ कर ले जाते हैं। कुत्ता यद्यपि बड़ा ही लाभदायक जानवर होते हैं। पर पागल होने पर बड़ा ही खतरनाक बन जाते हैं। उसके काटने पर इंजेक्शन लगवाना अनिवार्य हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि इंजेक्शन नहीं लगाने पर व्यक्ति को पागल होने की आशंका भी बनी रहती है।

घुमंतू जाति के लोग सदैव अपने साथ कुत्ते रखते हैं। उनमें शिकारी कुत्ते भी होते हैं। इनके मालिक छोटे छोटे जंगली जानवरों को शिकार करने में इन्हीं कुत्तों का प्रयोग करते हैं। कुत्तों की स्वामी भक्ति का अनेक कथाएं हमने पुस्तकों में भी पढ़ने को मिलती है। महाराज युधिष्ठिर को स्वर्ग तक ले जाने वाला एक कुत्ता ही था। हमें पालतू कुत्तों की अच्छी प्रकार से देखभाल करनी चाहिए। साथ ही अपरिचित कुत्तों से अपनी रक्षा करनी भी जरूरी है। उसके भोंकते ही हमें सावधान हो जाना चाहिए और अपना बचाव करना चाहिए।

Essay on Dog in Hindi in 500 Words

कुत्ता एक प्रसिद्ध घरेलू जानवर है। यह व्यक्ति को प्यार और इमानदारी से हमेशा साथ देती है। य अपने मालिक को बहुत अधिक प्यार करता है और उसको सम्मान देता है एवं उसके साथ सभी जगह जा भी सकता है। यह पूरे विश्व भर में पाय जाते हैं। एवं इसे मुख्य पालतू जानवर के रूप में भी माना जाता है, इसी कारण इसको घरों में पालतू जानवर की तरह ही रखा जाता है। कुत्ते जंगली भी हो सकते हैं और ऐसे कुत्तों को अफ्रीका, एशिया, और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में पाए जाते हैं।

कुछ कुत्ते जो पालतू नहीं है और गली में इधर-उधर घूमते रहते हैं, उन्हें गली के कुत्ते कहां जाता है। जंगली कुत्ते भारत में बहुत ही कम पाए जाते हैं। जैसे- हिमाचल प्रदेश, असम, उड़ीसा आदि स्थानों पर जंगली कुत्ते लोमड़ी और भेड़ियों की तरह देखा जाता है। कुत्ता रहने वाला स्थान को केनल कहा जाता है। इसके बच्चे को पप्पी, पाप, यह पिल्ला कहा जाता है। कुत्ते रंगो, आकारों, वजन, और आदतों में भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं। जो उनके प्रकार पर निर्भर करता है। पालतू कुत्ता सर्वाहारी भी हो सकता है।

कुछ कुत्ते ग्रीनलैंड, साइबेरिया जैसी ठंडे प्रदेशों में भी पाए जाते हैं। एक मादा कुत्ता एक समय में 3-6 पिल्लो को जन्म दे सकता है। माता कुत्ता पिल्लों को दूध पिलाती है और आत्मनिर्भर होने तक उनका ध्यान रखती है। एक कुत्ते की जीवन अवधि 12 से 15 साल तक की होती है ! हालांकि कुत्ता दिन में सोता रहता है, लेकिन वह रात के समय सक्रिय रहता है। इसी वजह से इसे रात का जानवर भी कहा जाता है। यह बहुत तरह की आवाजों को निकालता है, जो इनके अलग अलग मूड को दर्शाते हैं ! जैसे कि- उनकी भोकना, गुराना, चीख आदि। यह बहुत तेजी से दौड़ता है। जिसके कारण चोरों और अपराधियों को पकड़ने में पूरी तरह से सक्षम होता है।

कुत्ते को डीजीटी ग्रेड जानवर के रूप में भी कहा जाता है। क्यों कि चलते या दौड़ते समय अपने पैरों के अंगूठे का प्रयोग करता है। मांस खाने के लिए उनके पूरी तरह से विकसित केनाइन दांत होते हैं। उनके सूंघने और सुनने की क्षमता बहुत अच्छी होती है। इसके दृष्टि और समझने की शक्ति बहुत ही तेज होती है। इसी कारण से बुद्धिमान जानवर भी कहा जाता है। इसकी जीभ में मीठी ग्रंथियां पाई जाती है, जिस वजह से वह हाफ ने की प्रक्रिया के द्वारा खुद को ठहरा कर रखने में मददगार साबित होता है।

Essay on Dog in Hindi

कुछ लोग तो पालतू भेड़ पालते हैं एवं उनके पास कुत्ता अवश्य होते हैं, क्योंकि वे भेड़ों के देखभाल करने में बहुत ही उपयोगी साबित हुए हैं। वे किसी भी भेड़िया या लोमड़ी को भेड़ों के पास आकर आक्रमण करने की अनुमति नहीं देते हैं। यह बहुत ही देख रेख करने वाला जानवर होता है। और अजनबी यों, चोरों और अपराधियों को पकड़ सत्ता है, यहां तक कि वह कहीं भी छिपे क्यों ना हो। छिपे हुए चोरों या अपराधियों को खोजने के लिए कुत्ते अपने सूंघने की क्षमता का प्रयोग करता है। इसकी सी देख देख वाले स्वभाव और बुद्धिमत्ता के कारण पुलिस, सेना या अन्य जांचकर्ता विभाग के द्वारा खूनी ओं और अपराधियों को पकड़ने के लिए इसका सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है। यह पुलिस वालों को उस स्थान पर ले जाता है जहां खूनी या अपराधी छिपा हुआ होता है।

यह अपने मालिक को कभी भी नहीं छोड़ता, चाहे वह गरीब, भिखारी या अमीर हो। यह बहुत ईमानदारी से अपने मालिक के सभी आदेशों का अनुसरण करता है। यह सभी समय अपने मालिक की सेवा में सतर्क बना रहता है , चाहे वह दिन हो या रात। इसी कारण इसे वफादार जानवर भी कहा जाता है। कुत्ता अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अक्सर अपने पूछ को हिलाता रहता है। इंसानों की तुलना में कुत्तों का शरीर अधिक गर्म होता है। फिर भी इनके शरीर से पसीना नहीं निकलता है, यह सिर्फ उसके नाक और पंजों से ही पसीना को बाहर निकालता है।

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Dr. APJ Abdul Kalam Essay in Hindi – एपीजे अब्दुल कलाम पर निबंध

APJ Abdul Kalam Essay in Hindi

ए पी जे अब्दुल कलाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति, परमाणु वैज्ञानिक एवं मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध थे। अबुल पाकिर जैनुला अबदिन अब्दुल कलाम अथवा ए. पी. जे. अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता है। वे भारतीय गणतंत्र के 11वें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जाने माने वैज्ञानिक और अभियंत ( इंजीनियर) के रूप में भी विख्यात थे।

तो चलिए महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के जीवन और उनकी उपलब्धियों के बारे में बेहद सरल और आसान भाषा में अभिनय शब्द सीमा से इस निबंध को उपलब्ध कराते हैं।

About Abdul Kalam in Hindi

ए. पी. जे. अब्दुल कलाम लोकप्रिय ” मिसाइल मैन ऑफ इंडिया ” के नाम से जाना जाता है ! वह लोकप्रिय नागरिक पुरस्कार ” भारत रत्न ” को भी प्राप्त किए हैं। वह 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामाश्रम मैं एक मध्यम वर्ग के परिवार में जन्म लिए थे। गरीब होने के कारण उन्हें अपने बचपन में मूलभूत सुविधाओं से वंचित किया गया था। लेकिन फिर भी वे भविष्य में सबसे उल्लेखनीय वैज्ञानिक और भारत के 11वें राष्ट्रपति बने।

उनका जीवन इतिहास बहुत उत्साहजनक और कई लोगों के लिए प्रेरक है ! ए. पी. जे. अब्दुल कलाम भारत को मजबूत और समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण दृढ़ संकल्प लिए थे। वह ‘ सरल जीवन और उच्च विचार ‘ के लिए सही उदाहरण है। उनके नेतृत्व में भारत ने पहला सैटेलाइट लॉन्चिंग वाहन – एस एल बी – 3 तैयार किया गया था ! इसके अलावा भी उनके क्षेत्र में महान उपलब्धि करवाने वाला ” पृथ्वी, ए जी एन आई, आकाश और त्रिशूल ” जैसे मिसाइलें भी थी।

APJ Abdul Kalam Essay in Hindi

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Short Essay on APJ Abdul Kalam in Hindi

अब्दुल कलाम को जनसाधारण में डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम के रूप में जाना जाता है। भारतीय लोगों के दिलों में वह ” जनता के राष्ट्रपति ” और ” भारत के मिसाइल मैन ” के रूप में हमेशा जीवित रहेंगे। वास्तव में वह एक महान वैज्ञानिक थे, जिन्होंने बहुत सारे चीजों का आविष्कार किए है ! वह भारत के एक पूर्व राष्ट्रपति थे। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 में हुआ एवं उनका निधन 27 जुलाई 2015 में हुआ था ! उनका मृत्यु मेघालय के शिलांग में हुआ था।

कलाम के पिता का नाम जैनुलाब्दीन और मां का नाम आशी अम्मा था। एवं कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था ! वह जीवन भर अविवाहित रहे। कलाम एक महान इंसान थे जिन्हें भारत रत्न ( 1997 मैं), पद्म विभूषण ( 1990 मैं) , पद्मभूषण( 1981 ), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार 1997 ), रामानुजन अवॉर्ड ( 2000), किंग्स चार्ल्स द्वितीय मेडल ( 2007 ), इंटरनेशनल बोन अरमान विंग्स अवार्ड ( 2009 ), हु आर मेडल ( 2009 ), आदि से सम्मानित किया गया था।

APJ Abdul Kalam Essay in Hindi in 300 Words

वास्तव में डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम देश के सभी युवाओं के लिए एक सच्चे दिग्गज थे। वे अपने पूरे जीवन कार्य और लेखन के माध्यम से ही नई पीढ़ी को हमेशा प्रेरणा दी है। वह महान वैज्ञानिक थे और बेमानीक इंजीनियर भी थे, जो बहुत निकटता से भारत के मिसाइल कार्यक्रमों से जुड़े हुए थे। बाद में उन्होंने राष्ट्रपति के रूप में 2002 से लेकर 2007 तक देश को अपने बहुमूल्य सेवा भी प्रदान किए थे।

उनके शिक्षा की अगर बात किया जाए तो वह मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएशन करने के बाद वह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन से जुड़ गए थे। अब्दुल कलाम ने एक महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम अंबालाल साराभाई ( भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के पिता ) के सानिध्य में कार्य किया था। बाद में 1969 में कलाम भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपास्त्र, एसएलबी तृतीय के प्रोजेक्ट निर्देशक बने थे।

वह महान व्यक्ति थे उनकी मृत्यु अचानक हृदय गति रुक जाने के कारण 27 जुलाई 2015 को आई आई एम मेघालय में अपनी आखिरी सांससे लेकर प्राण त्याग दिए थे , वह शारीरिक रूप से भले ही हमारे बीच में मौजूद नहीं है, लेकिन फिर भी उनके देश के लिए किए गए महान कार्य और योगदान हमेशा हमारे साथ रहेंगे। वे अपने किताब ” भारत 2020 – नव निर्माण की रूपरेखा ” मैं, उन्होंने भारत को एक विकसित देश बनाने के लिए अपने सपनों को उल्लेखित किया था।

APJ Abdul Kalam Essay in Hindi under 500 Words

डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम एक महान भारतीय वैज्ञानिक थे। जिसने भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में 2002 वर्ष से 2007 तक देश की सेवा की है। वह भारत के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, क्योंकि एक वैज्ञानिक और राष्ट्रपति के रूप में देश के लिए उन्होंने बहुत बड़ा योगदान दिया था। ‘इसको’ के लिए दिया गया उनका योगदान अविस्मरणीय है। बहुत सारे प्रोजेक्ट को भी उनके नेतृत्व के द्वारा दिया गया था, जैसे की रोहिणी 1 का लांच, प्रोजेक्ट डेविल और प्रोजेक्ट वेलियंट, मिसाइलों का विकास ( अग्नि और पृथ्वी ) आदि।

भारत के परमाणु शक्ति को सुधारने में उनके महान योगदान के लिए उन्हें “भारत का मिसाइल मैन” भी कहा जाता है। अपने समर्पित कार्य के लिए ही उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से नवाजा गया था। भारत के राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के पूरा होने के उपरांत डॉक्टर कलाम ने विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक अतिथि प्रोफेसर के रूप में भी देश की सेवा की थी।

Biography of APJ Abdul Kalam in Hindi ( APJ Abdul Kalam Essay in Hindi )

कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम में हुआ था। कलाम के पिता मुस्लिम धर्म से थे, और वे बहुत ही गरीब व्यक्ति थे। इसलिए उन्होंने बचपन में अखबार के लड़के के रूप में भी काम किए थे। उन्हें अपने और अपनी परिवार के लिए आय को बढ़ाने की जरूरत पड़ी, जिस कारण वे सुबह समाचार पत्रों को वितरित किया करते थे एवं अन्य ऐसी कई सारी नौकरी भी किए थे।

वह गंभीरता से शिक्षित होना चाहते थे। लेकिन वह केवल एक औषत छात्र ही थे, फिर भी वह अपने मेहनत और इमानदारी के साथ गंभीर प्रयास किए और भौतिकी की डिग्री को पारित कर दिया। फिर उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में भाग लिया और उसे भी पूरा किया। साहस और कड़ी मेहनत के साथ उन्होंने बहुत सी कठिनाइयों का सामना किया था।

इसके बाद ए पी जे अब्दुल कलाम डीआरडीओ में शामिल हो गए और फिर उनके जीवन एक नए चरण में बदल गया। उन्होंने सफलता के साथ परियोजनाओं का प्रबंधन किया, वह सभ्य आदमी, टेक्नोक्रेट और एक अच्छे प्रबंधक की तुलना में एक शुद्ध वैज्ञानिक थे। उनके पास राजनीति और प्रभावशाली व्यक्तियों का समर्थन भी था।

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अन्य मंत्रियों ने उन्हें विभिन्न परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहित किया था। मिसाइलों पर उनकी भूमिका के लिए उन्हें समर्थन भी मिली। वह प्रधानमंत्री के सलाकार बने। वह राजनीति और प्रौद्योगिकी की में शामिल हो गए। वह भारत और दुनिया भर में सभी पक्षों के सम्मान प्राप्त करने का यज्ञ व्यक्ति है।

ए पी जे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति बन गए, क्योंकि वह एक गैर विवादास्पद, यज्ञ और सुशिक्षित थे। वह अपने जीवन में शादी नहीं की थी , उन्होंने अपने गरीब परिवार के सदस्यों को समर्थन देने के लिए राष्ट्र को ही अपना जीवन समर्पित कर दिए थे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मिशन की प्रगति ( विशेष रूप से रक्षा में ) उन्होंने युवा छात्रों को कई प्रेरक व्याख्यान और पाठ दिए है ! बच्चों के लिए कुछ पुस्तकों में उनके बारे में सबक भी दिए गए है। निश्चित रूप में अगर देखा जाए तो डॉ कलाम भारत के सबसे बड़े वैज्ञानिक थे। रक्षा और अनुसंधान क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।

APJ Abdul Kalam Biography in Hindi

1) ए पी जे अब्दुल कलाम का जन्म दक्षिण भारतीय राज्य के तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था।

2) पैसे से नाभिक कलाम के पिता ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे! ये मछुआरों को नाउ किराए पर देते थे। पांच भाई और पांच बहनों वाले परिवार को चलाने के लिए पिता के पैसे कम पड़ जाते थे। इसीलिए शुरूआती शिक्षा जारी रखने के लिए कलाम को अखबार बेचने का काम करना पड़ा था।

3) 8 साल की उम्र से ही कलाम सुबह 4:00 बजे उठते थे और नहा धोकर गणित की पढ़ाई करने के लिए चले जाते थे। सुबह नहा कर जाने के पीछे का कारण यह था कि प्रत्येक साल 5 बच्चों को मुफ्त में गणित पढ़ाने वाले उनके टीचर बिना नहाए आए बच्चों को नहीं पढ़ाते थे।

4) ट्यूशन से आने के बाद वह नमाज पढ़ते थे, और इसके बाद वह सुबह 8:00 बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज़पेपर बांटते थे।

5) भारत के सर्वोच्च पर नियुक्ति से पहले भारत रत्न पाने वाले कलाम देश के केवल तीसरे राष्ट्रपति ही है। उनकी मेहनत ही उन्हें इस मुकाम पर पहुंचा दिए ! उनसे पहले यह मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन ने हासिल किया था।

इसके अलावा भी उन्होंने अपने देश के लिए और भी कई सारे कार्य करके गए हैं। उनके विषय में जितना भी बात किया जाए उतना कम ही पड़ जाएगा।

हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा लिखा गया APJ Abdul Kalam Essay in Hindi को पढ़कर आप पसंद करेंगे। अगर आपको APJ Abdul Kalam Essay in Hindi अच्छा लगा हो तो अपने सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें और कमेंट के माध्यम से हमें जरूर बताएं।

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