Sambhaji Maharaj History in Hindi – संभाजी महाराज इतिहास

Sambhaji Maharaj History in Hindi

भारत के इतिहास में कई वीर हस्तियों ने अपना नाम अमर कर के गया है। उन्हीं में से एक है मराठा साम्राज्य के दूसरे छत्रपति संभाजी महाराज जी। शिवाजी के पुत्र के रूप में विख्यात संभाजी महाराज का जीवन भी अपने पिता छत्रपति शिवाजी महाराज के समान ही देश और हिंदुत्व को समर्पित रहा है।

संभाजी जी ने अपने बाल्यकाल से ही राज्य की राजनीति समस्याओं का निवारण करते थे। और इन दोनों में मिले संघर्ष एवं शिक्षा दीक्षा के कारण ही बाल शंभू जी राजे कालांतर में वीर संभाजी राजे बन सके थे।

लेख को शुरू करने से पहले आइए, मराठा साम्राज्य के बारे में कुछ जानकारी प्राप्त कर लेते हैं, जिसका उत्तराधिकारी थे छत्रपति संभाजी राजे।

Sambhaji Maharaj History in Hindi

एक भारतीय साम्राज्यवादी शक्ति थी जो 1674 से 1818 तक अस्तित्व में रहा ,मराठा साम्राज्य की स्थापना छत्रपति शिवाजी ने 1674 में डाली और तभी से इस साम्राज्य की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कई वर्ष औरंगजेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। बाद में आए पेशावरओने ईसे उत्तर भारत तक बढ़ाया, यह साम्राज्य 1818 तक चला, और लगभग पूरे भारत में फैल गया।

इसी साम्राज्य के दूसरे छत्रपति का नाम संभाजी था जोकि शिवाजी के पुत्र थे। तो आइए आव जानते हैं छत्रपति संभाजी मराठा का जीवन परिचय के बारे में।

Chatrapati Sambhaji Maharaj

संभाजी महाराज का जन्म 14 मई, 1657 में पुरंदर किले पर हुआ था। 2 साल की उम्र में ही उनकी मां की देहांत हो गई थी। फिर उनकी देखभाल उनकी दादी यानी जीजा बाई ने किया था। संभाजी महाराज बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति थे। वे केवल 13 साल की उम्र में ही तेरा भाषाएं सीख गए थे। कहीं शास्त्र भी लिख डाले थे, घुड़सवारी, तीरंदाजी, तलवारबाजी, यह सब तो मानों जैसे इनके बाएं हाथ का खेल था। छत्रपति संभाजी 9 वर्ष की अवस्था में पुण्यश्लोक छत्रपति श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रसिद्ध आगरा यात्रा में भी वे साथ में गए थे।

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औरंगजेब के बंदी गृह से निकल कर, पुण्यश्लोक छत्रपति श्री छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र वापस लौटने पर मुगलों से समझौते के फलस्वरूप, संभाजी मुगल सम्राट द्वारा राजा के पद तथा पंच हजारी म`सब से विभूषित हुए। उनको यह नौकरी मान्य नहीं थी। किंतु हिंदूवादी स्वराज्य स्थापना की शुरू के दिन होने के कारण और पिता पुण्यश्लोक छत्रपति श्री शिवाजी महाराज के आदेश के पालन हेतु केवल 9 साल के उम्र में ही इतना जिम्मेदारी और अपमानजनक कार्य उन्होंने धीरज से किया था।

संभाजी महाराज द्वारा लिखी रचनाएं :

कलश के संपर्क और मार्गदर्शन से संभाजी की साहित्य के तरफ रूचि बढ़ने लगी। उन्होंने अपने केवल 14 साल के उम्र में ही बुधभूषणम, नक्शीखांत, नायिका भेद, सात शतक यह तीन संस्कृत ग्रंथ लिखे थे। संभाजी महाराज संस्कृत के महान ज्ञानी थे।

छत्रपति श्री शिवाजी महाराज एक राजतंत्र :

पराक्रमी होने के बावजूद भी उन्हें अनेक लड़ाईऔ से दूर रखा गया था। स्वभावत: संवेदनशील रहने वाले संभाजी राजे उनके पिता शिवाजी महाराज जी के आज्ञा अनुसार मुगलों को जा मिले, ताकि वे उन्हें गुमराह कर सकें। क्योंकि उसी समय मराठा सेना दक्षिण दिशा के दिग्विजय से लौटी थी, और उन्हें फिर से जोश में आने के लिए समय चाहिए था।

इसलिए मुगलों को गुमराह करने के लिए पुण्यश्लोक छत्रपति श्री शिवाजी महाराज जी ने ही उन्हें भेजा था एवं वह एक राजतंत्र था! बाद में छत्रपति श्री शिवाजी महाराज जी ने ही उन्हें मुगलों से मुक्त किया था।

संभाजी की कवि कलश से मित्रता :

बचपन में संभाजी जब मुगल शासक औरंगजेब की कैद से बच कर भागे थे, तब वह अज्ञातवास के दौरान शिवाजी के दूर के मंत्री रघुनाथ कोर्ट के दूर के रिश्तेदार के यहां कुछ समय के लिए रुके थे। वहां संभाजी लगभग 1 से डेढ़ वर्ष तक के लिए रुके थे, तब संभाजी ने कुछ समय के लिए ब्राह्मण बालक के रूप में जीवनयापन किया था। इसके लिए मथुरा में उनका उपनयन संस्कार भी किया गया और उन्हें संस्कृति भी सिखाई गई। इसी दौरान संभाजी का परिचय कवि कलश से हुआ। संभाजी का उग्र और विद्रोही स्वभाव को सिर्फ कभी कलश ही संभाल सकते थे।

Sambhaji Maharaj History in Hindi

राज्याभिषेक :

छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु के बाद, एक शोक पर्वत उन पर एवं स्वराज पर टूट पड़ा था। लेकिन इस स्थिति में संभाजी महाराज ने स्वराज्य की जिम्मेदारी संभाली। कुछ लोगों ने धर्म वीर छत्रपति श्री संभाजी महाराज के अनुज राजा राम को सिंहासन आसीन करने का प्रयत्न किया था। किंतु सेनापति हं वीर राव मोहिते के रहते यह कारस्थान नाकामयाब हुआ।

16 जनवरी 1681 को संभाजी महाराज का विधिवत राज्याभिषेक हुआ। उन्होंने अन्नाजी दत्तो और मोरोपंत पेशवा को उदार हृदय से क्षमा कर दिया एवं उन्हें अष्टप्रधान मंडल में रखा। हालांकि कुछ समय बाद, अन्नाजी दत्तो और मंत्रियों ने हीं फिर से संभाजी राजे के खिलाफ साजिश रची और राजा राम का राज्याभिषेक की योजना किया गया था। संभाजी राजे ने स्वराज्य द्रोही अन्नाजी दत्तो और उनके सहयोगी यों को हाथी के पांव के नीचे मार डाला।

संभाजी पर औरंगजेब का अत्याचार :

1689 तक स्थितियां बदल चुकी थी। मराठा राज्य संगमेश्वर मैं शत्रुओं के आगमन से अनभिज्ञ था। ऐसे में मुकर्रम खान के अचानक आक्रमण से मुगल सेना महल तक पहुंच गई, और संभाजी के साथ कवि कलश को भी बंदी बना लिया। एवं उन दोनों को कारागार में डाला गया, और उन्हें वेद विरुद्ध इस्लाम अपनाने को विवश किया गया।

औरंगजेब के शासनकाल के अधिकारिक इतिहासकार मसीर प्रथम अंबारी और कुछ मराठा शत्रुओं के अनुसार दोनों को चैन से जकड़ कर हाथी के होदे से बांधकर औरंगजेब के कैंप तक ले जाया जाता था जोकि अकलुज में था। उसके बाद वहां उन दोनों को तहखाने में भी डालने की आदेश दिया गया था। इतने यातना ओ के बाद भी हार ना मानने पर संभाजी और कलश को कैद से निकाल कर उन दोनों को घंटी वाली टोपी पहना दी गई एवं उनका काफी अपमान भी किया गया था।

औरंगजेब ने कहा कि अगर वह अपना धर्म परिवर्तन कर लेते हैं तो संभाजी और उनके मित्रों को माफी मिल जाएगी। संभाजी इस बातों से साफ इनकार कर दिया। फिर संभाजी ने अपने ईश्वर को याद किया और कहने लगे कि धर्म के भेद को समझने के बाद वह अपना जीवन बार बार और हर बार राष्ट्र को समर्पित करने को तत्पर है। अर्थात संभाजी औरंगजेब से बिल्कुल हार नहीं माने।

इन सब के उपरांत औरंगजेब ने क्रोधित होकर संभाजी के घाव पर नमक छिड़काया और उन पर बहुत अत्याचार भी किए। परंतु संभाजी ने बिल्कुल भी औरंगजेब के आगे सर नहीं झुकाया। संभाजी को रोज इसी प्रकार प्रताड़ित किया जाता था। 11 मार्च 1989 को उनका सर धड़ से अलग कर दिया गया था और इस प्रकार उनकी मृत्यु हुई थी।

छत्रपति संभाजी महाराज की कुछ सरल जानकारियां ( Sambhaji Maharaj History in Hindi )

नाम संभाजी
उपनाम छबा और संभाजी राजे
जन्मदिन 14 मई 1657
जन्म स्थान पुरंदर के किले में
माता- पिता सई बाई – छत्रपति शिवाजी
दादा – दादी  शाहजी भोंसले – जीजाबाई
भाई – बहन सकू बाई, अंबिका बाई , रनु बाई, जाधव , दीपा बाई, कमलाबाई, पलकर , सिरके
पत्नी येसूबाई
मित्र और सलाहकार कवि कलश
कौशल संस्कृत में ज्ञाता, कला प्रेमी और वीर योद्धा
युद्ध 1669 में वाई का युद्ध
शत्रु औरंगजेब
मृत्यु 11 मार्च 1689
आराध्य देव महादेव
मृत्यु का कारण औरंगजेब की दी गई यातना नहीं मानने के कारण

 

विवाद : अपने परिवार में पिता जी शिवाजी से विवाद होने पर नजरबंद किया और वहां से भाग निकले और मुगलों में जाकर शामिल हो गए और इस्लाम अपना लिया लेकिन मुगलों के अत्याचार को देख कर पुण लौट आए। पारिवारिक राजनीति का शिकार हुए।

उपलब्धियां : औरंगजेब के सामने कभी घुटने नहीं टेके, अंतिम सांस तक योद्धा की भांति डटे रहे।

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National Emblem of India in Hindi – भारत के राष्ट्रीय प्रतीक पर निबंध

National Emblem of India in Hindi

हर एक राष्ट्र की अपनी एक अलग पहचान होती है, जिसे सर्वसम्मति से एवं सब के द्वारा स्वीकार किया जाता है। राष्ट्र की पहचान, राष्ट्र के प्रतीक एवं वहां के नागरिकों से होती है। देश के राष्ट्रीय प्रतीक का अपना एक इतिहास, व्यक्तित्व और विशिष्टता होती है, भारत के राष्ट्रीय प्रतीक देश का प्रतिबिंब है, जिसे बहुत सोच समझकर चुना गया है।

Information About National Emblem in Hindi

राष्ट्रीय प्रतीक साधारणत: सारनाथ के सम्राट अशोक के साम्राज्य से लिया गया है, जो अशोक के काल में अशोक द्वारा बनवाया गया था। इसे भारत के सारनाथ यानी उत्तर प्रदेश राज्य के थोड़े दूर वाराणसी के पास स्थापित किया गया है। राष्ट्रीय प्रतीक पर 4 शेर उभरते हुए दिखाई देते हैं, जो एशिया के इलाकों में पाए जाते हैं। जब हम इस प्रतीक को देखते हैं तो हमें केवल 3 शेर ही दिखाई देती है। क्योंकि चौथा शेर इनके पीछे की तरफ होती है। इसी कारण इसे चारों दिशाओं की सुरक्षात्मक मुद्रा कहा जाता है।

यह आकृति शक्ति, साहस, और जीत का प्रतीक है। इसके साथ ही इसमें नीचे की और एक हाथी, एक घोड़ा, एक बेल और एक शेर की आकृति भी बनी हुई है। इसके बीच में अशोक चक्र भी बनी हुई है। 26 जनवरी 1950 में जब देश का संविधान लागू हुआ था तब इसे देश का राजकीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया था। इसे एक ही पत्थर पर नक्काशी करके बनाया गया है। इसके नीचे “सत्यमेव जयते” लिखा हुआ है। जिसे हिंदू वेद से लिया गया है। यह आज भी सारनाथ के संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। इस आकृति के सुपर धर्म चक्र भी बना हुआ है।

National Emblem of India in Hindi

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National Symbols of India in Hindi

1) राष्ट्रीय प्रतीकों  कों अशोक के सारनाथ के स्तूप में से लिया गया है।

2) जिस दिन भारत 1 गणतंत्र राष्ट्र बना था, उसी दिन सरकार ने इस प्रतीक को अपनाया था , और वह दिन 1950 के 26 जनवरी थे।

3) इस प्रति के सिर्फ 3 सिंगही दिखाई देते हैं, चौथा हमेशा छिपा हुआ रहता है।

4) केंद्र में दिखाई देने वाले चक्र की दाएं तरफ बेल और बाई तरफ एक घोड़ा होता है।

5) राष्ट्रीय प्रतीक में दिखाए गए सिंह शक्ति, साहस, आत्म विश्वास और गर्भ को प्रदर्शित करते हैं।

6) हाथी को बुद्ध का अवतार माना जाता है, क्योंकि इनकी माता ने एक बार सपना देखा था की, एक सफेद हाथी उनके गर्भ में प्रवेश किया है।

7) बेल बुद्ध की राशि वृषभ का प्रतीक है। एवं घोड़ा उस घोड़े का प्रतीक है जिस पर बैठ कर वे जीवन का सार ढूंढने के लिए घर से निकल पड़े थे। और सिंह आत्मज्ञान की प्राप्ति का प्रतीक होती है।

8) सत्यमेव जयते शब्द अबेकस के नीचे देवनागरी लिपि में लिखा गया है। यह शब्द मुंड उपनिषद से लिए गए हैं, जिसका अर्थ होता है “सत्य की विजय होती है”।

9) सारनाथ के सिंह स्तंभ जैसी संरचना थाईलैंड में भी मिली थी।

10) इस राष्ट्रीय प्रतीक का प्रयोग से शासकीय प्रयोजनों में किया जाता है। क्योंकि इसमें सर्वोच्च सम्मान और निष्ठा निहित है।

11) सारनाथ के सिंह स्तंभ का प्रयोग विभिन्न सरकारी पत्रों पर किया जाता है। और यह भारतीय मुद्रा पर भी मुद्रित होता है।

12) अशोक चक्र भारतीय राष्ट्रीय झंडे का हिस्सा है।

National Emblem of India in Hindi

प्रतीक चिन्ह के अलावा भी भारतीय गणराज्य में और भी बहुत से अधिकारिक राष्ट्रीय प्रतीक होती है। जिनमें ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट, ध्वज, राष्ट्रीय चिन्ह, भजन, यादगार इमारतें, और बहुत से देश भक्त भी शामिल है।

इन सभी प्रतीकों का भारतीय इतिहास में बहुत महत्व रहा है। भारत के ध्वज के डिजाइन को निर्वाचित एसेंबली ने आजादी के कुछ समय पहले 22 जुलाई 1947 को ही स्वीकृत किया था ! इसके अलावा भी भारत में दूसरे बहुत सारे और भी राष्ट्रीय प्रतीक होते हैं जिनमें राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय पक्षी, राष्ट्रीय फूल, राष्ट्रीय फल, और राष्ट्रीय पेड़ भी शामिल है।

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Essay on Nari Shakti in Hindi ( Women Empowerment) – महिला सशक्तिकरण पर निबंध

Essay on Nari Shakti in Hindi

Women Empowerment in Hindi

आज हम नारी शक्ति, यानी ( महिला सशक्तिकरण ) के बारे में जानेंगे ।

नारी शक्ति के बारे में जानने से पहले हमें यह समझना आवश्यक है की – नारी शक्ति का वास्तविक मतलब क्या है ! नारी शक्ति मतलब महिलाओं की उस क्षमता है, जिसके कारण उनमें वह योग्यता आती है जिससे वह अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय खुद ले सकती है ।

नारी अगर अपना कदम उठा लेती है तो परिवार आगे बढ़ता है , गांव आगे बढ़ता है, और राष्ट्र भी विकास की ओर बढ़ता है ।

Essay on Nari Shakti in Hindi

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Essay on Nari Shakti in Hindi Under 100 Words

नारी को हम प्राचीन काल से ही शक्ति के प्रतीक मानते आए हैं । तब से लेकर आज तक ऐसे कई उदाहरण हमें देखने के लिए मिले हैं, जिससे हम नारी को एक शक्ति कहते हैं।

देखा जाए तो नारी स्वभाव से बहुत ही अच्छी होती है, लेकिन कोई भी व्यक्ति नारी पर अत्याचार करते हैं तो वे अपना विकराल स्वरूप धारण कर लेती है और वह उस दुष्ट की नाश करके ही छोड़ते हैं। नारी मां का स्वरूप होती है। वास्तव में हमारे समाज में नारी शक्ति का महत्वपूर्ण योगदान है ! लेकिन कुछ लोगों ने नारी को आज भी तुच्छ या फिर कमजोर साबित करते रहते हैं। यह उन लोगों की सबसे बड़ी भूल है। क्योंकि नारी आज के जमाने की सबसे बड़ी शक्ति है।

Essay on Nari Shakti in Hindi Under 200 Words

लिंग असमानता भारत की मुख्य सामाजिक मुद्दा है। जिसमें महिलाएं पुरुषवादी प्रमुख देश में पीछे जाने के लिए मजबूर हो रही है। जिस प्रकार से किसी रथ को ठीक से चलने के लिए दोनों पहियों की जरूरत होती है , ठीक उसी प्रकार महिलाओं को समाज में सशक्त करना आवश्यक होती है ।

महिला शक्ति को साधारण रूप से इस प्रकार समझा जा सकता है । महिला शक्ति का तात्पर्य यह है कि महिलाओं की शक्तिशाली होने की ही बात की गई है। जिसमें महिलाएं अपने जिंदगी से संबंधित हर एक फैसला खुद ले सके , तथा समाज में सर ऊंचा करके रह सके ।

महिलाएं अगर अपने समाज में खुद की पहचान बनाए रखने में सक्षम हो सकती है तो इसे भी हम नारी शक्ति की ही प्रतीक मानते हैं ।
भारतवर्ष एक पुरुष प्रधान देश है, जिसके लिए पुरुषों पर आर्थिक दायित्व तथा महिलाओं के लिए अपने परिवार की जिम्मेदारियां संभालना होती है। एवं साथ ही साथ महिलाओं के लिए कुछ पाबंदिया भी होती है। भारत की लगभग 50% आबादी महिलाओं की है। और देश के विकास में भी इनका योगदान अति अवश्य माना गया है। परंतु भारत की महिलाएं अभी भी पूर्ण रूप से सशक्त हो नहीं पाई है , क्योंकि उन्हें कई प्रकार के पाबंदी यो से बंधा रखा गया है। अतः राष्ट्र में सुधार एवं विकास के लिए नारी शक्ति का आवश्यक अति महत्वपूर्ण है। और नारी शक्ति को हमें सम्मान भी देनी चाहिए।

Essay on Nari Shakti in Hindi Under 500 Words ( Nari Sashaktikaran)

नारी के गुणों के बारे में अगर बात किया जाए तो – वे स्वभाव से बहुत ही सरल और मीठे स्वाभाव की होती है। उनके अंदर काफी गून भी देखने को मिलते हैं। नारी के अंदर सहनशीलता बहुत ही ज्यादा होती है। हम यदि गौर से देखें तो नारी में हमें एक बात यह भी देखने को मिलता है- की नारी बचपन से लेकर बुढ़ापे तक सब कुछ सहन करती जाती है, वह किसी को जवाब भी नहीं देती। बचपन से ही नारी को यह बात समझाया जाता है।

इसलिए शादी के बाद भी ससुराल में सबकी हर एक बात मानकर चल सकती है। इसके अलावा नारी में संघर्ष करने का गुण भी होती है ! अगर वह कुछ कार्य को पूरा करने के लिए ठान ले तो आसानी से पीछे हटती नहीं। वे उस कार्य के सफलता को प्राप्त करने के लिए लगातार संघर्ष करती रहती है। यही गुण नारी के अंदर विद्यमान होती है। नारी के अंदर धैर्य बहुत अधिक होता है , परंतु य हद से ज्यादा बढ़ जाए तो , यानी कोई उसे ज्यादा तंग करे तो फिर नारी – शक्ति, का रूप ले लेती है , और इस शक्ति रुपी नारी को देख कर अच्छे अच्छों को भी पीछे हटते हुए नजर आते हैं।

पहले जमाने से लेकर आज की नारी की अगर बात की जाए तो, हम देख सकते हैं कि पहले के जमाने में भी बहुत ऐसी नारियों ने जन्म लिया है जिन्होंने नारी को कमजोर ना समझते हुए अपने आप को साहस पूर्ण एवं निडर होकर बुराई का सामना किया , और अच्छे अच्छों की छक्के छुड़ा दिए। लेकिन पहले की नारी थोड़ी कमजोर भी थी। जैसे कि हम जानते हैं पहले जमाने में नारी संबंधित कई कुप्रथा प्रचलित थी, इसके अलावा भी- पर्दा प्रथा, नारी शिक्षा पर जोड़ ना देना , नारी को केबल घर गृहस्ती के कार्य में ही नियोजित करना, या फिर अपने खुद के निर्णय लेने का अधिकार ना देना। यही पावन दिया पहले जमाने में हम देखते थे।

लेकिन बदलते जमाने में इस आधुनिक युग में कुछ हद तक इस तरह की कुप्रथा बंद होती हुई हमें नजर आ रही है। और नारी को कमजोर नहीं बल्कि एक शक्तिशाली नारी के रूप में देखने को मिल रहा है। जैसे कि आज की नारियों को हम हरे क्षेत्र में भाग लेते हुए नजर आते हैं।
आज नारी पुरुषों की तरह डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर बनती नजर आ रही है। और तो और देश की प्रधानमंत्री भी एक नारी ही रह चुकी है ।आजकल तो देश की हर क्षेत्र में हमें नारी ही मुख्यमंत्री होती हुई नजर आ रही है।

Women Empowerment Essay in Hindi ( Mahila Sashaktikaran )

वास्तव में नारी पुरुषों से बिल्कुल भी कमजोर नहीं है। नारी देश की सबसे बड़ी शक्ति है और आने वाले समय में नारी सबसे आगे बढ़ेगी। यही सत्य है।

लेकिन दुख के साथ हमें यह कहना पड़ रहा है कि, हमारे देश भारत में आज भी नारी सुरक्षित नहीं है। नारी पर कई तरह के अत्याचार भी किए जाते हैं हमारे भारत देश में। भारत में नारियों को सशक्त बनने के लिए सबसे पहले समाज में उनके अधिकार एवं मूल्य सम्मान देना आवश्यक है। भारतवर्ष में नारी अधिकारों को नाश करने वाले उन नीच सोच को ही हमें जड़ से नाश करना जरूरी है। जैसे कि दहेज प्रथा , यौन हिंसा , अशिक्षा, असमानता, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, आदि मिटाना चाहिए ! जिसके कारण राष्ट्र में संस्कृति सामाजिक आर्थिक और शैक्षिक अंतर ले आता है जिससे हमारे देश पीछे पढ़ने की संभावना रखती है।

नारी शक्ति करण के सपनों को अगर सच कर्णी हो तो- लड़कियों की महत्व एवं उनकी शिक्षा की ओर ध्यान देना एवं प्रचारित करना जरूरी है। इसके साथ ही हमें नारी के प्रति हमारी सोच को भी विकसित करना होगा। तभी नारी शक्ति को उसकी सम्मान एवं सही मर्यादा प्राप्त होगी और यह हम सबका कर्तव्य है कि नारी शक्ति को हम सम्मान के साथ ग्रहण कर ले ।

-: जब है नारी में शक्ति सारी, तो फिर क्यों नारी को कहे बेचारी :-

नारी शक्ति (नारी सशक्तिकरण) के बारे में यह छोटी सी निबंध ( Essay on Nari Shakti in Hindi ) पर कर आप सभी को पसंद आया होगा यही आशा रखते हैं !

धन्यवाद

Essay on Healthy Food in Hindi – स्वस्थ भोजन पर निबंध

Essay on Healthy Food in Hindi

Healthy Food Essay in Hindi

हर व्यक्ति को जीवित रहने के लिए भोजन की जरूरत होती है। भोजन हमें शक्ति प्रदान करता है.. लेकिन शक्ति भी तभी मिलती है जब खाया जाने वाला आहार पोस्टिक हो ।

एक स्वस्थ कर जीवन के लिए पौष्टिक आहार बहुत ही जरूरी होती है । हमें स्वाद से ज्यादा खाने की पौष्टिकता पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए । इसलिए आपको अपने खाने की दिन चर्चा इस तरह से बनानी चाहिए कि तीनों समय या समय-समय पर कोई ना कोई पोस्टिक भोजन हमारे शरीर में प्रवेश कर सके । जिससे हम हमारे जीवन को एक सुंदर और स्वस्थ जीवन बना सके ।

Essay on Healthy Food in Hindi

Importance of Healthy Food in Hindi

पोस्टिक आहार स्वस्थ जीवन के लिए बहुत ही जरूरी होते हैं । इसलिए पोस्टिक भोजन करना हमारे लिए सिर्फ जरूरत नहीं बल्कि जरूरी है । इसलिए हमें बच्चों को भी पोस्टिक आहार खिलाना चाहिए ! और उन्हें जंक फूड से दूर रखना चाहिए तथा उसके बदले में पोस्टिक भोजन देना चाहिए ! जैसे कि सब जानते हैं, कि बच्चों को साधारण भोजन पसंद नहीं आता और वह जल्द ही उससे बोर भी हो जाते है । इसलिए बच्चों को पौष्टिक आहार खिलाने के लिए नए-नए तरीके निकालने चाहिए । जैसे कि हम जानते हैं कि बच्चों को रंग बिरंगा भोजन बहुत ही पसंद आते हैं ।

इसलिए उन्हें गाजर,मूली आदि सब्जियों का सलाद बना कर भी खिलाया जा सकता है ! जिस का अलग-अलग रंग देखकर उनको आकर्षित करेगा ! इसके अलावा भी पोस्टिक तत्व से भरपूर शिमला मिर्च, पालक, मलाई आदि का पिज़्ज़ा बना कर भी खिलाया जा सकता है! जिनसे उन्हें पौष्टिक तत्व के साथ साथ स्वाद भी मिलेंगे और आनंद भी । पोस्टिक आहार सिर्फ बच्चों को ही नहीं बड़ों को भी लेना अति आवश्यक है । क्योंकि आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में ऊर्जा और हिम्मत की बहुत ही जरूरत होती है ! एक इंसान के अंदर पर्याप्त मात्रा में पोस्टिक तत्व होने पर ही वे अच्छे से काम कर पता है । इसलिए हमें दिन चर्चा मैं पौष्टिक आहार को सम्मिलित करना होगा  जिसके कारण हमारे शरीर पर्याप्त पोषण पा सके । इसके अलावा भी हमें जंक फूड का त्याग देना चाहिए ! जोकि असल में एक अस्वस्थ कर भोजन है ! जिसमें कृत्रिम रंग और साद होते हैं । जो हमारे शरीर के लिए लुक सानदाय होती है । जंक फूड के कारण शरीर में मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी खतरनाक बीमारियों का कारण भी बनता है । दूसरी तरफ पोस्टिक भोजन इन बीमारियों से हमें बचाते हैं ।

Essay on Healthy Food in Hindi Under 300 words

आज हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे फूड्स के बारे में जो प्रोटीन से भरे होते हैं । प्रोटीन भोजन एक मुख्य आवश्यक तत्व है, प्रोटीन मानव शरीर के विकास व वृद्धि में सहायक पोशाक तत्व है! यही तत्व शरीर की कोशिकाओं को अर्थात मांस आदि का निर्माण करता है इसकी प्रचूर मात्रा भोजन में रहने से शरीर की कोशिकाओं का निर्मित और मरम्मत आदि कार्य के लिए सुचारू रूप से जीवन भर चलता रहता है। हमारे शरीर के सभी प्रक्रियाओं को अलग अलग मात्रा में अलग अलग समय पर प्रोटींस की जरूरत पड़ती है, शरीर हर समय प्रोटींस का इस्तेमाल करता रहता है, और हमेशा इसकी पूर्ति करना आवश्यक होता है, इसलिए स्वास्थ्य और निरोगी रहने के लिए रोज आहार में प्रोटीन लेना आवश्यक होता है।

प्रोटीन के अलावा विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, फैट जैसे पोष्टिक तत्व भी हमारे शरीर में संतुलित मात्रा में होते हैं।  संतुलित आहार के अंतर्गत मनुष्य अनाज, हरी सब्जियां, दूध, दही और फल आदि खा सकता है जोकि बहुत ही पोस्टिक होते हैं। आधुनिक युग में लोग पौष्टिक आहार से दूर होते हुए हमें दिखाई पर रहे हैं। और तो और पोष्टिक आहार ना लेने के कारण बच्चों में मोटापा, मधुमेह, और ह्रदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां उत्पन्न होती जा रही है ।

स्वस्थ भोजन खाने के रूप में हमें अधिक पानी पीना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है ! स्वस्थ भोजन मस्तिष्क और शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाता है । फॉलो, सब्जियों का भोजन करने से भी हमारे शरीर और मस्तिष्क को स्वस्थ, मजबूत और सक्रिय बनाता है ! यह एक अच्छा शरीर के वजन को बनाए रखने में और बीमारियों से लड़ने में मदद करता है । स्वस्थ हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है ! पौष्टिक आहार के साथ साथ हमें नियमित व्यायाम का भी आवश्यकता होती है । जिसके लिए हमें नियमित 3-4 घंटे रोजाना तेज चलने का अभ्यास भी करना चाहिए । उसके अलावा भी हाथ व्यायाम, खेलकूद आदि भी कर्णी चाहिए जिसके कारण यह हमारे स्वस्थ ठीक रखने में सहायक मंद सिद्ध होगा ।

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Essay on Healthy Food in Hindi

तो आइए अब हम आपको बताते हैं कि प्रोटीन के लिए क्या क्या खाना हमारे लिए आवश्यक है: 

(1) हरी सब्जियां – इसमें प्रोटीन, कैल्शियम की मात्रा काफी रहता है । यह शरीर को ताकत देती है एवं आंखों की रोशनी को भी बढ़ाती है।

(2) मसूर की दाल – इस दाल की सेवन से खून को बढ़ावा मिलती है । इसके अलावा इसमें काफी मात्रा में विटामिन बी पाए जाते हैं, मसूर दाल की सेवन से काफी बीमारियां भी ठीक हो जाती है ।

(3) दही – प्रोटीन का सबसे अच्छा साधन है दही । रोज दही के इस्तेमाल से शरीर ठीक और निरोग रहता है । दही खाने से इंसान की उम्र भी बढ़ती है । एक बात हमें याद रखना चाहिए की दही को रात में ना खाया जाए इससे शरीर में नुकसान हो सकती है ।

(4) दूध- दूध में प्रोटीन के अलावा भी फास्फोरस, कैल्शियम और विटामिन भी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं दूध हमारे शरीर के लिए एक पूर्ण मात्रा की आहार है ।

(5) सोयाबीन- सोयाबीन भी प्रोटीन से भरपूर खाद्य है । सोयाबीन से बनाने वाले पदार्थ भी शरीर में प्रोटीन पहुंचाता है । यह बच्चों तथा बड़ों को भी मानसिक एवं शारीरिक रूप से ठीक बनाए रखने में उपयोगी साबित हुई है !

(6) पीनट बटर- 1 दिन में दो चम्मच पीनट बटर खाने से आपकी दिन भर की प्रोटीन की जरूरत पूरी हो जाती है । 2 चम्मच पीनट बटर मैं करीब 8 ग्राम प्रोटीन होती है ! यह बीमारी से भी बचाती है ।

(7) बादाम- मुट्ठी भर बादाम खाने से भी हमारे शरीर 6 ग्राम प्रोटीन प्राप्त कर सकती है । यह दिल के लिए भी बहुत ही फायदेमंद होते हैं ।

(8) हरी गोभी- हरी गोभी में भी प्रोटीन के साथ साथ एंटी ऑक्सीडेंट मिनरल और फाइबर भी काफी मात्रा में पाए जाते हैं ।

(9) पालक- पालक 1 ऐसी सुपर फूड है जिसमें प्रोटीन भारी मात्रा में पाए जाते हैं ! पालक में एंटी एक्सीडेंट, विटामिन और मिनरल भी पाए जाते हैं ।

हमारे द्वारा बताए जाने वाले इन्हीं टॉप हाई प्रोटीन वाले फूड्स को अगर आप अपने जीवन में शामिल करेंगे तो आपको अपनी लाइफ में भरपूर प्रोटीन मिलता रहेगा ।

तो उम्मीद करते हैं हमारे द्वारा दी गई जानकारियां आपके लिए लाभदायक होगी । और हम आशा करते हैं की आपको हमारा यह निबंध (Essay on Healthy Food in Hindi) जरूर पसंद आया होगा ।

धन्यवाद

Importance of Books in Hindi – पुस्तकों का महत्व

Essay on Importance of Books in Hindi

आज मैं आपको पुस्तक के महत्व के बारे में बताऊंगा कि जो हमारे जीवन में भूमिका निभाता है। किताबों ज्ञान,ज्ञानका ग्रोत है जो हमारा सबसे अच्छा दोस्त है जो हमें मदद करता है, हमें सलाह देता है। जो हमें ज्ञान देता है और हमारी स्मृति शक्ति और बुद्धि को विकसित करने में मदद करता है।

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मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जो एक समाज में रहना है। जिसमे रहने के लिए उसे बहुत सी बातों का ज्ञान होनी चाहिए। पुस्तक हमें ज्ञान देती है, वह ज्ञान का सागर है। किसी भी विषय के बारे में जानने के लिए पहले गुरु या लोग ही प्रमुख साधन होते हैं, लेकिन आव सभी बातें पुस्तकों में मिल जाती है जिन्हें पढ़कर मनुष्य का सामाजिक और मानसिक विकास होती है।

About Books in Hindi

पुस्तक अमर है क्योंकि बहुत से प्राचीन किताबों को लिखने वालों का निधन हो गया लेकिन उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक आज भी जीवित है और हमारा मार्गदर्शन करते हैं, पुस्तक पढ़ने वालोंकि को हर मुसीबत का हाल मिल जाता है क्योंकि उसकी स्थिति से मिलती-जुलती स्थिति के विषय में उन्होंने कहीं ना कहीं पढ़ा होता है, जो हमारी सहयोगी होती है।

पुस्तक हमारी सच्ची मित्र होती है। वह हमें सब विषय में सहायता करती है, पुस्तक में हर तरह की ज्ञान मिल जाती है। इसीलिए पुस्तक हमारा सच्चीवाला मित्र होती है। जब भी हमें किसी भी मुसीबत में होते है तो पुस्तक इ हमें स्थाई से ही रास्ता देखाते है। पुस्तक में हम 200 साल भी पुराना मंदिर, राजा की कहानियां, इतिहास सब पुराना चीजों को आसानी से पढ़ सकते हैं। हर विषय की अपनी किताब है जिससे कि हम बिना किसी भी मुसीबत से अपने पसंदीदा विषय के बारे में ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

आज के समय में पुस्तक के भारी मात्रा में उपलब्ध है। जिसमें गीता, रामायण आदि, जैसी पुस्तकों को पढ़कर मन को परम शांति का अनुभव होता है। जब हम अकेले होते हैं पुस्तक हमारी मनोरंजन का कारण भी बनती है।

Essay on Books in Hindi

पुस्तक से हमें ज्ञान की प्राप्ति होती हैं। पुस्तकों के माध्यम से हम तरह-तरह की बातें जान सकते हैं। अच्छी पुस्तकों से हम अच्छी
शब्द और बातों की जानकारी मिलती है, हमारा ज्ञान बढ़ता है। अच्छी पुस्तक सबसे अच्छी दोस्त होती है, पुस्तक हमारी जीवन में एक महत्वपूर्ण रोल अदा करते हैं। पुस्तक जितना वफादार और कोई नहीं होता है। एक पुस्तक ज्ञान तो हमें देती ही है इससे हमारा अच्छा खासा मनोरंजन भी हो जाता है। पुस्तक तो प्रेरणा का भंडार होती है। इन्हें पट़कार ही हमें जीवन में महान कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। पुस्तक अपने विचारों और भावनाओं को दूसरों तक पहुंचाने का सबसे अच्छा तरीका है।

प्राचीन समय में पुस्तक आसानी से प्राप्त नहीं होती थी। उस वक्त ज्ञान का माध्यम केबल बानी के द्वारा ही किया जाता था। आज के आधुनिक युग में हर विषय पर अव जानकारीया हर भाषा में पुस्तकों में प्रकाशित होने लगी हैं।

पुस्तक चरित्र निर्माण का सबसे अच्छा साधन होती है। अच्छे विचारों, प्रेरणादायक कहानियां से भरपुर किताबों से देश को युवा पीढ़ी को एक नई दिशा दी जा सकती है। इनसे ही देश में एकता का पाठ पढ़ाया जा सकता है। इसलिए पुस्तक ज्ञान की वेहती हुई गंगा है जो कभी नहीं थमती। किंतु देखा गया है कि कुछ पुस्तक ऐसी भी होती है जो हमारा गलत मार्गदर्शन करते हैं। इसीलिए हमें ऐसी पुस्तकों को पड़ने से बचना चाहिए, हमेशा ज्ञान और प्रेरणादायक पुस्तक को ही पढ़नी चाहिए।

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