Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi – डॉ राजेंद्र प्रसाद पर निबंध

डॉ राजेंद्र प्रसाद वह व्यक्ति थे, जीने की सादगी और सरलता किसी को भी प्रभावित कर देती थी। इन्हें आदर और सम्मान के साथ राजेंद्र बाबू भी कहा जाता है। स्वाधीन भारत के सर्वप्रथम राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए भी अहंकार से पूरी तरह मुकर रहने वाले और किसान जैसी वेशभूषा में रहने वाले व्यक्ति थे हमारे राजेंद्र बाबू।

राष्ट्रपति के सूची में पहला नाम डॉ राजेंद्र प्रसाद का ही आता है। जो भारतीय संविधान के आर्किटेक्ट और आजाद भारत के पहले राष्ट्रपति भी थे। वह महात्मा गांधी के काफी करीबी सहयोगी भी थे। इसी वजह से वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में भी शामिल हो गए थे और बाद में बिहार क्षेत्र के प्रसिद्ध नेता बने। नमक सत्याग्रह के भी वह सक्रिय नेता थे। भारत छोड़ो आंदोलन में भी उन्होंने भाग लिया था एवं ब्रिटिश अधिकारियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।

About Dr Rajendra Prasad in Hindi (डॉ राजेंद्र प्रसाद के जीवन परिचय )

पूरा नाम डॉ राजेंद्र प्रसाद
धर्म हिंदू
जन्म 3 दिसंबर 1884
जन्म स्थान बिहार (जीरादेई)
माता- पिता कमलेश्वरी देवी – महादेव सहाय
शिक्षा 1907 मैं कोलकाता विश्वविद्यालय से M.A., 1910 में बैचलर ऑफ ल उत्तीर्ण , 1915 में मास्टर ऑफ लॉ पूरा किया था ।
विवाह राजवंशी देवी (1896 )
मृत्यु 28 फरवरी, 1963 पटना बिहार

Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi

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Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi in 200 Words

डॉ राजेंद्र प्रसाद भारतीय लोकतंत्र के पहले राष्ट्रपति थे। साथ ही एक भारतीय राजनीति के सफल नेता, और प्रशिक्षक वकील भी थे। भारतीय स्वतंत्रता अभियान के दौरान वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और बिहार क्षेत्र से वह एक बड़े नेता साबित हुए थे। महात्मा गांधी के सहायक होने की वजह से प्रसाद को ब्रिटिश अथॉरिटी ने 1931 के नमक सत्याग्रह और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में जेल में भी डाला गया था।

राजेंद्र प्रसाद ने 1934 से 1935 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रूप में भारत की सेवा की। और 1946 के चुनाव में सेंट्रल गवर्नमेंट की फूड एंड एग्रीकल्चर मंत्री के रूप में सेवा की। 1947 में आजादी के बाद प्रसाद को संगठक सभा में राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया गया था। 1950 में भारत जब स्वतंत्र गणतंत्र बना, तब अधिकारिक रूप से संगठक सभा द्वारा भारत का पहला राष्ट्रपति चुना गया। इसी तरह 1951 के चुनाव में समिति द्वारा चुनाव निर्वाचन समिति द्वारा उन्हें वहां का अध्यक्ष चुना गया।

राष्ट्रपति बनते ही प्रसाद ने कई सामाजिक भलाई के काम किए, कई सरकारी दफ्तरों की भी स्थापना की और उसी समय उन्होंने कांग्रेस पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया। राज्य सरकार के मुख्य होने के कारण उन्होंने कई राज्य में पढ़ाई का विकास किया कई पढ़ाई करने की संस्थाओं का निर्माण भी किया और शिक्षण क्षेत्र के विकास पर ज्यादा ध्यान देने लगे।

उनके इसी तरह के विकास भरे काम को देख कर 1957 के चुनावों में चुनाव समिति द्वारा उन्हें फिर से राष्ट्रपति घोषित किया गया और वे अकेले ऐसे व्यक्ति बने, जिन्हें लगातार दो बार भारत का राष्ट्रपति चुना गया था।

Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi in 700 Words

डॉ राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के एक छोटे से जीरादेई में हुआ था। इनके पिता का नाम महादेव सहाय था, एवं माता का नाम कमलेश्वरी देवी थी। इनके पिता संस्कृत व फारसी भाषा के बहुत बड़े ज्ञानी थे। जबकि माता एक धार्मिक महिला थी, वे राजेंद्र प्रसाद को रामायण की कहानियां भी सुनाया करती थी। डॉ प्रसाद का 12 साल की उम्र में ही बाल विवाह हो गया था। उनकी पत्नी का नाम राजवंशी देवी थी।

प्रसाद की शिक्षा की अगर बात किया जाए तो 5 साल की उम्र में ही प्रसाद के माता पिता उनको एक मौलवी के यहां भेजते थे, ताकि वह फारसी, उर्दू, हिंदी भाषा का ज्ञान प्राप्त कर सकें। डॉ राजेंद्र प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा उन्हीं के गांव जीरादेई में हुआ था। पढ़ाई की तरफ इनका ज्ञान बचपन से ही था। अपने भाई महेंद्र प्रताप के 7 वे पटना के पीके घोष अकैडमी में जाने लगे।

इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ कोलकाता में प्रवेश के लिए परीक्षा दी, जिसमें वह बहुत अच्छे नंबर से पास हुए, जिसके बाद उन्हें हर महीने ₹30 की स्कॉलरशिप भी मिलने लगी। उनके गांव से पहली बार किसी युवक ने कोलकाता विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने में सफलता प्राप्त की थी। जो निश्चित रूप से राजेंद्र प्रसाद और उनके परिवार के लिए बड़ी ही गर्व की बात थी।

Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi

1902 में प्रसाद जी ने प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिल लिया, जहां से उन्होंने संपादक किया। 1907 मैं यूनिवर्सिटी आफ कोलकाता से इकोनॉमिक्स में M.A. किया। सन 1915 में कानून के मास्टर की डिग्री पूरी की जिसके लिए उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था। इसके बाद उन्होंने कानून में डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त कर ली। इसके बाद पटना आकर वकालत करने लगे जिससे इन्हें बहुत धन और नाम मिला।

उन्होंने अपने आप को सादगी, सेवा, त्याग, देश भक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन में पूरी तरह से नियोजित कर दिया था। डॉ राजेंद्र बाबू अत्यंत सरल और गंभीर प्रकृति के व्यक्ति थे। वे सभी वर्ग के लोगों से समान रूप से व्यवहार रखते थे।

राजनीति की अगर बात किया जाए तो- बिहार में अंग्रेज सरकार के नील खेती के लिए सरकार अपने मजदूरों को उचित वेतन नहीं देते थे। तब 1917 में गांधी जी ने बिहार आकर इस समस्या को दूर करने की पहल की, उसी दौरान डॉ प्रसाद गांधीजी से मिले। उनकी विचारधारा से वे बहुत प्रभावित हुए। 1919 में पूरे भारत में सभी नए आंदोलन की लहर थी। गांधी जी ने सभी स्कूल, सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करने की अपील की ! जिसके बाद डॉक्टर प्रसाद ने अपनी नौकरी छोड़ दिए थे।

चंपारण आंदोलन के दौरान राजेंद्र प्रसाद गांधी जी के वफादार साथी बन गए थे। गांधी जी के प्रभाव में आने के बाद उन्होंने अपने पुराने और रूढ़िवादी विचारधारा का त्याग कर दिया था ! और एक नई ऊर्जा के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। 1931 में कांग्रेस ने आंदोलन छेड़ दिया था। इस दौरान डॉ प्रसाद को कई बार जेल जाना पड़ा। 1934 में उनको मुंबई कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। उन्हें एक से अधिक बार अध्यक्ष बनाएं गए। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में इन्होंने भाग लिया। जिस दौरान वे गिरफ्तार हुए और उन्हें नजर बंद करके रखा गया था।

Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi

भले ही 15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। लेकिन संविधान सभा का गठन उससे कुछ समय पहले ही कर लिया गया था। संविधान निर्माण में भीमराव अंबेडकर व राजेंद्र प्रसाद ने मुख्य भूमिका निभाई थी। भारतीय संविधान समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ प्रसाद को चुना गया था। संविधान पर हस्ताक्षर करके डॉ प्रसाद ने ही इसे मान्यता दी थी।

26 जनवरी 1950 को भारत के लोगों को डॉ राजेंद्र प्रसाद के रूप में प्रथम राष्ट्रपति मिल गया। 1959 में फिर राष्ट्रपति चुनाव हुई। एवं यह पहली वह आखरी बार था जब एक ही इंसान दो बार लगातार राष्ट्रपति बना था। 1962 तक वे सर्वोच्च पद पर विराजमान रहे। 1962 में वे अपने पद को त्याग कर पटना चले गए और बिहार विद्यापीठ में रहकर जन सेवा करके अपना जीवन व्यतीत करने लगे।

सन 1962 में अपने राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ सम्मान ” भारत रत्न ” से नवाजा गया था। वेद विद्वान, प्रभावशाली, द्रड़ निश्चय और उदार दृष्टिकोण वाले व्यक्ति थे।

28 फरवरी, 1963 को डॉ प्रसाद का निधन हो गया। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसी घटनाएं है जो यह प्रमाणित करती है कि राजेंद्र प्रसाद बेहद दयालु और निर्मल स्वभाव के व्यक्ति थे। भारतीय राजनीतिक इतिहास में उनकी छवि एक महान और विनम्र राष्ट्रपति की है। पटना में प्रसाद जी की याद में ” राजेंद्र स्मृति संग्रहालय” का निर्माण कराया गया।

Short Dr Rajendra Prasad Essay in Hindi

1) 1906 मैं ‘ बिहारी क्लब ‘ जो राजेंद्र बाबू के पहले से स्थापना किया गया था, उनके सचिव बने थे वह।

2) 1908 मैं राजेंद्र बाबू ने मुजफ्फरपुर के ब्राह्मण कॉलेज में अंग्रेजी विषय के अध्यापक की नौकरी मिली और कुछ समय वह उस कॉलेज के अध्यापक के पद पर रहे।

3) 1909 कोलकाता सिटी कॉलेज में अर्थशास्त्र विषय का उन्होंने अध्यापन किया।

4) 1911 मैं राजेंद्र बाबू ने कोलकाता उच्च न्यायालय में वकील का व्यवसाय शुरू किया था।

5) 1914 में बिहार और बंगाल इन दो राज्य में बाढ़ के वजह से हजारों लोगों को बेघर होने की नौबत आई थी। तब राजेंद्र बाबू ने दिन रात एक कर के बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद की थी।

6) 1916 में उन्होंने पटना उच्च न्यायालय में वकील का व्यवसाय शुरू किया था।

7) 1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में भी वह शामिल हुई। इसी साल में उन्होंने ‘देश’ नाम का हिंदी भाषा में साप्ताहिक निकाला था।

8) 1921 में राजेंद्र बाबू ने बिहार विश्वविद्यालय की स्थापना की।

9) 1928 में हालैंड में ” विश्व युवा शांति परिषद ” हुई उसमें राजेंद्र बाबू ने भारत की ओर से हिस्सा लिया और भाषण भी दिया था।

10) स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति होने का सम्मान राजेंद्र बाबू को मिला।

11) 1950 से 1962 ऐसे ही 12 साल तक उनके पास राष्ट्रपति पद रहा। बाद में बाकी का जीवन उन्होंने स्थापना किए हुए पटना के सदाकत आश्रम में ही गुजारा।

डॉ राजेंद्र प्रसाद में भारत का विकास करने की चाहत थी। वे लगातार भारतीय कानूनों व्यवस्था को बदलते रहे, और अपने सहकर्मियों के साथ मिलकर उसे और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास करने लगे। इसी तरह हम भी भारत के ही निवासी है हमारा भी कर्तव्य बनती है कि हम भी हमारे देश के लिए एवं हमारे देश के विकास में सरकार की मदद करें। ताकि दुनिया की नजरों में हम भारत का दर्जा ऊंचा कर सके।

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धन्यवाद –

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