Essay on GST in Hindi – वस्तु एवं सेवा कर पर निबंध

Essay on GST in Hindi

GST Information in Hindi

य निबंध हमने जीएसटी यानी ( वस्तु एवं सेवा कर ) के ऊपर लिखा है। भारत सरकार ने जीएसटी को 1 जुलाई 2017 से आरंभ कर दिया है। हम सभी को जीएसटी यानी ( वस्तु एवं सेवा कर ) के बारे में पता होना बहुत जरूरी है तो आइए अब हम नीचे जीएसटी के बारे में पढ़ते हैं।

Essay on GST in Hindi in 100 Words

वस्तु एवं सेवा कर यानी , GST एक व्यापक बहुस्तरीय गंतव्य आधारित कर है। जो प्रत्येक मूल्य में लगाया जाता है।  इसे समझने के लिए हमें इस परिभाषा के तहत शब्दों को समझना होगा। तो अब हम इसे “बहु- स्तरीय ” शब्दों के साथ शुरू करते हैं। कोई भी वस्तु को निर्माण से लेकर अंतिम तक कई चरणों के माध्यम से गुजरना पड़ता है।

पहला चरण – कच्चे माल को खरीदना, दूसरा चरण- उत्पादन का निर्माण होना, फिर सामग्रियों के भंडारण या हिम घर में डालने की व्यवस्था। इसके बाद उत्पाद रिटेलर या फुटकर विक्रेता के पास आता है। और अंतिम चरण में , रिटेलर आपको या अंतिम उपभोक्ता को यह सारे माल बेचता है। इसी प्रकार से ” बस्तु स्तरीय ” रूप में जीएसटी का प्रयोग किया जाता है।

Essay on GST in Hindi

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Essay on GST in Hindi in 250 Words

वस्तु एवं सेवा कर एक ऐसी प्रणाली है जिसमें विभिन्न प्रकार के करो से निजात पाकर सभी राज्यों में एक समान कर प्रणाली लागू करता है। इससे ग्राहकों को अंतिम स्तर पर ही भुगतान करना होगा, तथा इससे घरेलू व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार एवं निवेश हेतु प्रतिस्पर्धा जैसी वातावरण के निर्माण में सहायता मिलेगी।

भारत सरकार द्वारा सन 1991 में समान कर प्रणाली लागू करने की चर्चा की गई थी जिससे वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य वृद्धि पर रोक लग सके। प्रतिस्पर्धात्मक बाजार के कारण राजेशो वृद्धि हो सके। इस संदर्भ में मूल्य संवर्धित कर की अगली करी के रूप में वस्तु एवं सेवा कर विधायकों को लाने की आवश्यकता महसूस की गई। भारत सरकार ने इससे 1 जुलाई 2017 से पूरे देश में लागू करने का निर्णय लिया था।

वस्तु एवं सेवा कर की दृष्टि भूमि पहली बार – 2006-07 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबर द्वारा फिर से स्थापना की गई थी पर उस समय यह राज्य की सर्वसम्मति एवं कमियों की वजह से पारित ना हो सका ! सन 2014 में सरकार ने इसे संशोधित कर एक नए अवतार में विधायकों को राज्य के समक्ष रखा जिसमें 5 वर्षीय मुआवजे की बात कहां गया एवं प्रथम 3 वर्ष 100% चौथा वर्षा 75% वह 5 वर्ष में 50% मुआवजा की बात रखी गई थी।

भारत में कर वसूली का अधिकार राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार दोनों के पास है। अतः जीएसटी को तीन भागों में विभाजित किया जाता है।
(i) स्टेट जीएसटी,
(ii) सेंट्रल जीएसटी, एवं
(iii) इंटीग्रेटेड जीएसटी

कल प्रणाली किसी राष्ट्र की आर्थिक रीड होती है। यह जितना ही मजबूत होगी आरती ढांचा उतनी ही सुंदर होगी। वस्तु एवं सेवा कर से संबंधित अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को देख कर सकारात्मक व नकारात्मक परिणाम परिलक्षित होती है।

भारत जैसे उभरते शक्ति के लि इस प्रकार की आर्थिक सुविधाएं होना आवश्यक होती है।

Essay on GST in Hindi in 500 Words

इस संशोधित विधायक में केंद्र व राज्य के मध्य बेहतर तालमेल उत्पन्न करने के लिए वस्तु एवं सेवा कर परिषद गठन की योजना प्रस्तावित की गई थी। जिसमें 2/3 मत की आवश्यकता होगी।

जैसे कि एल्कोहल एक महत्वपूर्ण मुद्दा था। इसे कर के दायरे से बाहर रखा गया! साथी ही पेट्रोल व डीजल जैसे पेट्रोलियम उत्पादों को भी कुछ समय के लिए इस कर प्रणाली से बाहर रखा गया है। इसके अतिरिक्त कर संबंधित व्यवस्था करने हेतु परिषद को भी व्यापक अधिकार दिया गया है।

संकेत में कहे तो सरकार विवादित मुद्दों को विराम देते हुए इस विधायक को सबकी सहमति से पारित करवाने हेतु कटिबद्ध दिख रहे है। यदि जीएसटी विधायक के मार्ग में आने वाली बाधाओं की बात की जाए तो अधिकतर महत्वपूर्ण विवादों का समाधान ढूंढ लिया गया है। इसका प्रमाण इस तथ्य से देखा जा सकता है, की प्रस्तावित विधायक को लगभग आधे राज्य की सहमति मिल चुकी है एवं अन्य राज्यों की आशंकाओं के समान केंद्र राज्य के बीच भी प्रयास किए जा रहा है।

सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर विधायकों को अप्रैल 2016 में पारित किए थे। एवं इस विधायक को 2015 के शीतकालीन क्षेत्र में लोकसभा में भी चर्चा किया गया था। वस्तु एवं सेवा कर विधायक पारित हो चुकी थी और 1 जुलाई 2017 से स्कोर शुरू किया गया था।

इसके अलावा भी जीएसटी वस्तुओं एवं सेवाओं पर लगाए जाने वाला एक आकृति अप्रत्यक्ष कर है। जिससे केंद्रीय उत्पाद शुल्क, राज्य स्तरीय वेट, क्राय कर, विलासिता कर, मनोरंजन शुल्क, सेवा कर आदि भी शामिल है।

वस्तु एवं सेवा कर के महत्व अब हम जीएसटी समझ गए हैं तो हम देखते हैं कि यह बात टैक्स संरचना को और अर्थव्यवस्था को बदलने में इतने महत्वपूर्ण भूमिका क्यू निभाए गी।

वर्तमान भारतीय कर संरचना दो भागों में विभाजित किया गया है- प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर। प्रत्यक्ष कर या डायरेक्ट टैक्स वह है जिसमें देनदारी किसी दूसरे को नहीं दी जा सकती। इसका एक उदाहरण आयकर है जहां हम सब अर्जित करते हैं, और केवल हम उस पर कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदाई है। अप्रत्यक्ष कर के मामले में टैक्स की देनदारी किसी अन्य व्यक्ति को दी जा सकती है।

इसका मतलब यह है कि जब दुकानदार अपने बिक्री पर वेट देता है तो वह अपने ग्राहकों को भी दे सकता है। इसलिए ग्राहक आइटम की कीमत और वेट पर भुगतान करता है, ताकि दुकानदार सरकार को वेट जमा कर सके। इसका मतलब ग्राहक ना केवल उत्पादन की कीमत का भुगतान करता है, बल्कि उसे GST भी देना पड़ता है, और इसलिए जब वह किसी आइटम को खरीदता है तो फिर उसे अधिक खर्च करना पड़ता है। यह सब इसलिए होता है क्योंकि दुकानदार को जब वह आइटम व्यापारी से खरीदा था तब उसे कर का भुगतान करना पड़ा था।

Advantage of GST in Hindi

1) किसी भी राज्य में सामान का एक दाम:  जीएसटी लागू होने से सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा।  पूरे देश में किसी भी सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स सबको चुकाना पड़ेगा। यानी पूरे देश में सभी को सामान के रेट एक ही देना होगा।

2) कर विभाग में कमी: अगर यह लागू हो जाता है तो कई बार टैक्स देने से छुटकारा मिल जाएगा। इससे कर की वसूली करते समय कर विभाग के अधिकारियों द्वारा कर में हेरा फेरी की संभावना भी कम हो जाएगी। इसके अलावा जहां कई राज्य में राजस्व बढ़ेगा तो कोई जगह कीमत काफी कम होगी।

3) कम होगी सामान की कीमत : इसके लागू होने से टैक्स का ढांचा भी पारदर्शी होगा जिससे काफी हद तक टैक्स विवाद कम होगी। इसके लागू होने के बाद राज्य को मिलने वाला मनोरंजन कर, लग्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स आदि भी खत्म हो जाएगी।

Disadvantage of GST in Hindi

जीएसटी लागू होने से केंद्र को तो फायदा होगा लेकिन राज्य को इस बात का डर रहेगा कि इससे उन्हें नुकसान भुगतना पड़ेगा। क्योंकि इसके बाद वे कई तरह के टैक्स वसूली कर नहीं सकता, जिससे उनकी कमाई कम हो जाएगी

इसके अलावा भी कई राज्यों का आधा बजट जैसे पेट्रोल एवं डीजल से चलने वाला कमाई भी बंद पड़ जाएगी। इस बातों को ध्यान में रखकर इन्हीं वस्तुओं से शुरुआती सालों में टैक्स लेते रहे जिस कारण राज्य को जो भी नुकसान होगा केंद्र उसकी भरपाई 5 साल तक करेगा।

आशा रखते हैं Essay on GST in Hindi के बारे में यह छोटी सी निबंध ( Essay on GST in Hindi ) पर कर आप सभी को पसंद आया होगा।

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