Christmas Essay in Hindi – क्रिसमस पर निबंध

Christmas Essay in Hindi

दोस्तों, आज हम बात करने वाले हैं क्रिसमस के बारे में। आज के इस लेख में, मैं आपको ईसाई धर्म के सबसे बड़े त्योहार क्रिसमस पर निबंध लिखकर इसके विषय में विस्तार से आप सभी को इसके महत्व एवं सुखी पूर्ण भावना का आनंद देने की आशा करती हूं।  तो चलिए नीचे लिखे गए शब्द को पढ़कर हम क्रिसमस के बारे में जान लेते हैं।

Paragraph on Christmas in Hindi

‘क्रिसमस’ ईसाईयों का प्रसिद्ध त्योहार है। य 25 दिसंबर को प्रतिवर्ष संपूर्ण विश्व में धूमधाम से मनाया जाता है ! और बच्चे तो क्रिसमस का बेसब्री से इंतजार करते रहते हैं। वह मानते हैं सांता आएगा और उन लोगों के लिए ढेर सारा गिफ्ट लाएगा। क्रिसमस का त्योहार ईसाई मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को ‘ बड़ दिन ‘ भी कहा जाता है ! क्रिसमस एक बड़ा त्योहार है जिसे लोगों द्वारा ठंड के मौसम में मनाया जाता है। इस दिन पर सभी सांस्कृतिक अवकाश का लुप्त उठाते हैं ! तथा इस अवसर पर सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों को बंद रखा जाता है।

इस उत्सव को लोग बहुत उत्साह और ढेर सारी तैयारियों तथा सजावट के साथ मनाते हैं। नए नए कपड़े खरीदे जाते हैं। ईसाई लोग क्रिसमस के दिन विभिन्न प्रकार के व्यंजन भी बनाते हैं। इसके अलावा भी बाजारो की रौनक भी बढ़ जाती है। घर और बाजार रंगीन रोशनीओं से जगमग उठते हैं।

क्रिसमस के दिन गिरजा घरों में विशेष प्रार्थना है की जाती है एवं जगह-जगह प्रभु ईसा मसीहा की झांकियां प्रस्तुत की जाती है। उस दिन घर के आंगन में क्रिसमस ट्री भी लगाया जाता है। क्रिसमस के त्योहार में केक का विशेष महत्व होता है। इस दिन लोग एक दूसरे को केक खिलाकर त्यौहार की बधाई देते हैं। और तो और सांता क्लॉस का रूप धरकर व्यक्ति बच्चों को टॉफिया, विभिन्न प्रकार के उपहार आदि भी बांटता है।

Christmas Essay in Hindi

National Emblem of India in Hindi  | Soil Pollution in Hindi | Essay on Rabbit in Hindi Language 

Christmas Essay in Hindi in 300 Words

क्रिसमस शब्द अंग्रेजी दो शब्दों से मिलकर बनाया गया है, Christ और mass जिसमें Christ का मतलब ‘ क्रिस्टियन’ और mass का मतलब ‘ लोग ‘ होता है। ईसाई समुदायों के लिए क्रिसमस एक महत्वपूर्ण त्योहार है। हालांकि यह पूरी दुनिया में दूसरे धर्मों के लोगों द्वारा भी मनाया जाता है। य एक प्राचीन उत्सव है जिसको बरसों से ही शीत ऋतु में मनाया जाता है। यह प्रभु यीशु के जन्मदिवस पर मनाया जाता है। जिन्हें ईसाई धर्म के लोगों द्वारा भगवान की संतान माना जाता है। उस दिन पारिवारिक सदस्यों में सभी को सांता क्लॉस के दादा मध्य रात्रि में उपहार बांटने की परंपरा भी शामिल होती है।

सांता रात के समय सभी के घरों में जाकर उनको उपहार बांटता है। खासतौर से बच्चों को वह मजेदार उपहार देता है। तब बच्चे बड़ी ही व्याकुलता से संता का और इस दिन का इंतजार करता रहता है। एवं वह अपने माता पिता से पूछते हैं कि कब शांत आएगा और उन्हें तोहफा देगा और उसी बीच बच्चों का इंतजार खत्म होता है एवं ढेर सारे उपहारों के साथ सांता मध्य रात्रि को 12:00 बजे के आसपास आता है एवं उपहार दे कर चला जाता है।

Information About Christmas in Hindi

क्रिसमस के त्योहार में एक परंपरा है कि लोग उस दिन अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को सुंदर ग्रीटिंग कार्ड भेजते हैं, और उसके बदले में भेजने वालों को भी ग्रीटिंग कार्ड दिया जाता है। प्रत्येक परिवार के लोग और दोस्त एक साथ मिलकर रात के दावत में शामिल होते हैं।

इस पर्व में मिठाइयां, चॉकलेट, ग्रीटिंग कार्ड, क्रिसमस पेड़, सजावटी वस्तुएं आदि, पारिवारिक सदस्य, दोस्तों, रिश्तेदारों, और पड़ोसियों को देने की परंपरा माना गया है। लोग तो पूरे जुनून के साथ महीने की शुरुआत में ही इसकी तैयारियों में जुट जाते है। इस दिन को लोग गाने गाकर, नाच कर, पार्टी मना कर एवं अपने प्रिय जनों से मिलकर आनंद उपभोग करते हैं। इसके अलावा लोगों का ऐसा मानना है कि प्रभु ईशा को मानव जाति की रक्षा के लिए ही धरती पर भेजा गया है।

दुनिया भर में क्रिसमस के बारे में जानने के लिए बहुत कुछ है। पूरी दुनिया में क्रिसमस, युवा और वृद्ध लोगों द्वारा प्यार किया जाने वाला एक विशेष और जादुई अवकाश माना जाता है। इसी तरह से ही क्रिसमस का त्योहार लोगों को सब के साथ मिलजुल कर रहने का संदेश देता है। ईशा मसीह कहते थे कि दिन- दुखियो की सेवा करना संसार का सबसे बड़ा धर्म होता है।

Christmas Essay in Hindi in 500 Words

जैसे कि आगे भी हमने पढ़ा था कि ईसाइयों के लिए क्रिसमस एक बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार होता है, हालांकि इसे दूसरे धर्मों के लोग भी बड़े उल्लास के साथ मनाते हैं। इस उत्सव को हर साल पूरे विश्व में दूसरे उत्सवों की तरह ही खुशी, हर्ष और जोश के साथ मनाया जाता है। यह हर साल 25 दिसंबर शीत ऋतु के मौसम में आता है। प्रभु यीशु के जन्म दिवस के अवसर पर क्रिसमस डे को मनाया जाता है। 25 दिसंबर को प्रभु यीशु का जन्म हुआ था। उनके पिता के नाम जोसेफ, और मेरी मां का नाम था। उनके जन्म बेथलेहम में हुआ था।

क्रिसमस को क्यों मनाया जाता है ?

क्रिसमस यीशु मसीहा के जन्म का उत्सव है। कुछ लोग क्रिसमस को अलग अलग तरीके से मनाते हैं। लेकिन यह सब मसीहा के जन्म पर ही आधारित होता है। क्रिसमस 25 दिसंबर को होती है। यह वह दिन है जब यीशु का जन्म हुआ था। लेकिन कोई भी वास्तव में यीशु की जन्म तिथि को सटीक तारीख क्या है नहीं जानता है। फिर भी, 137 सदी में रूम के बिशप ने क्राइस्ट बच्चे के जन्मदिन को एक गंभीर दावत के रूप में मनाया जाने का आदेश दिया था। 350 सदी मैं जूलियन प्रथम नाम का एक और रोमन बिशप 25 दिसंबर को क्रिसमस ( मसीहा की मास ) के पालन दिवस के रूप में 25 दिसंबर को ही चयन करता है।

क्रिसमस की सजावट कैसे की जाती है ?

इस दिन पर सभी घर और चर्च की सफाई किए जाते हैं। सफेद पुताई और ढेर सारे रंग बिरंगे रोशनीयो, मोमबत्तियां, फूल और दूसरी सजावटी चीजों से इनको सजाया जाता है। सभी एक साथ इस उत्सव में शामिल होते हैं। चाहे वह गरीब हो या फिर अमीर। और खूब धमा चौकड़ी के साथ इसको मनाया जाता है।

अपने घरों के बीच में सभी क्रिसमस के पेड़ को सजाते हैं। वह इसे इलेक्ट्रिक लाइट, उपहारों, गुब्बारों, फूलों, खिलौना, हरी पत्तियां एवं दूसरे वस्तुओं से सजाते हैं। क्रिसमस का पेड़ बेहद सुंदर और आकर्षित दिखाई देता है। उस अवसर पर सभी लोग अपने दोस्त, परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसियों के साथ क्रिसमस के पेड़ के सामने खुशी मनाते हैं। एवं सभी नृत्य, संगीत, उपहारों को बांटकर एवं लजीज पकवानों के साथ इस उत्सव में शरीक होते हैं।

क्रिसमस ट्री ( Christmas in Hindi )

क्रिसमस का त्योहार बिना क्रिसमस ट्री के बगर कभी भी पूरा नहीं हो सकता है। क्रिसमस ट्री सजाने की यह प्रथा काफी लंबे समय से ही चली आ रही है, क्रिसमस ट्री को यीशु का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। क्रिसमस ट्री के रूप में प्राकृतिक रूप से देवदारु के पेड़ों का उपयोग किया जाता है। इस दिन लोग क्रिसमस ट्री को तमाम तरह के सितारों, गुब्बारे, झालरों, और तोहफा आदि से सजाते हैं। ऐसा माना जाता है कि क्रिसमस ट्री हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और नकारात्मक तथा बुराइयों को दूर करता है।

सांता क्लॉस ( Santa Claus in Hindi )

सांता क्लॉस या संत निकोलस क्रिसमस का एक अभिनना हिस्सा होता है। ऐसा माना जाता है कि सांता क्लॉज़ 7 हीरोइनो द्वारा खींचे जाने वाले बे पहिया गाड़ी पर सवार होकर आते हैं और क्रिसमस पर बच्चों को तोहफा बढ़ते हैं। इसीलिए इस त्यौहार को लेकर बच्चे काफी उत्साहित रहते हैं। इस दिन कई सारे लोग सांता क्लॉस का कपड़ा धारण करके बच्चों में चॉकलेट और तोहफे बांटते है।

Lines on Christmas in Hindi

1) क्रिसमस का त्योहार व्यापारियों के लिए सबसे ज्यादा मुनाफा वाला समय होता है।

2) एक पुस्तक के अनुसार क्रिसमस के पेड़ की शुरुआत सन 1570 में किया गया था।

3) क्रिसमस के पर्व के लिए प्रतिवर्ष यूरोप में 60 लाख पेड़ उगाए जाते हैं।

क्रिसमस वह त्योहार है जो लोगों में प्यार मोहब्बत और भाईचारा बढ़ाता है। यही कारण है कि लोग क्रिसमस के त्योहार के एक दिन पहले ही 24 दिसंबर के शाम से ही एक दूसरे को क्रिसमस की शुभकामनाएं देना शुरू कर देते हैं। यह वह समय होता है जब लोग अपने दोस्तों और परिवारों से मिलते हैं। तथा अपने आपसी प्यार मोहब्बत और एकता को बढ़ाते हैं। क्रिसमस का यह त्यौहार हमें ईशा मसीहा द्वारा दिखाए गए क्षमा, भाईचारा और त्याग जैसी बातों का बोध कराता है , जिन्हें हम अपने जीवन में अपनाकर मानवता को तरक्की के पथ पर अग्रषित कर सकते हैं।

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National Emblem of India in Hindi – भारत के राष्ट्रीय प्रतीक पर निबंध

National Emblem of India in Hindi

हर एक राष्ट्र की अपनी एक अलग पहचान होती है, जिसे सर्वसम्मति से एवं सब के द्वारा स्वीकार किया जाता है। राष्ट्र की पहचान, राष्ट्र के प्रतीक एवं वहां के नागरिकों से होती है। देश के राष्ट्रीय प्रतीक का अपना एक इतिहास, व्यक्तित्व और विशिष्टता होती है, भारत के राष्ट्रीय प्रतीक देश का प्रतिबिंब है, जिसे बहुत सोच समझकर चुना गया है।

Information About National Emblem in Hindi

राष्ट्रीय प्रतीक साधारणत: सारनाथ के सम्राट अशोक के साम्राज्य से लिया गया है, जो अशोक के काल में अशोक द्वारा बनवाया गया था। इसे भारत के सारनाथ यानी उत्तर प्रदेश राज्य के थोड़े दूर वाराणसी के पास स्थापित किया गया है। राष्ट्रीय प्रतीक पर 4 शेर उभरते हुए दिखाई देते हैं, जो एशिया के इलाकों में पाए जाते हैं। जब हम इस प्रतीक को देखते हैं तो हमें केवल 3 शेर ही दिखाई देती है। क्योंकि चौथा शेर इनके पीछे की तरफ होती है। इसी कारण इसे चारों दिशाओं की सुरक्षात्मक मुद्रा कहा जाता है।

यह आकृति शक्ति, साहस, और जीत का प्रतीक है। इसके साथ ही इसमें नीचे की और एक हाथी, एक घोड़ा, एक बेल और एक शेर की आकृति भी बनी हुई है। इसके बीच में अशोक चक्र भी बनी हुई है। 26 जनवरी 1950 में जब देश का संविधान लागू हुआ था तब इसे देश का राजकीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया था। इसे एक ही पत्थर पर नक्काशी करके बनाया गया है। इसके नीचे “सत्यमेव जयते” लिखा हुआ है। जिसे हिंदू वेद से लिया गया है। यह आज भी सारनाथ के संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। इस आकृति के सुपर धर्म चक्र भी बना हुआ है।

National Emblem of India in Hindi

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National Symbols of India in Hindi

1) राष्ट्रीय प्रतीकों  कों अशोक के सारनाथ के स्तूप में से लिया गया है।

2) जिस दिन भारत 1 गणतंत्र राष्ट्र बना था, उसी दिन सरकार ने इस प्रतीक को अपनाया था , और वह दिन 1950 के 26 जनवरी थे।

3) इस प्रति के सिर्फ 3 सिंगही दिखाई देते हैं, चौथा हमेशा छिपा हुआ रहता है।

4) केंद्र में दिखाई देने वाले चक्र की दाएं तरफ बेल और बाई तरफ एक घोड़ा होता है।

5) राष्ट्रीय प्रतीक में दिखाए गए सिंह शक्ति, साहस, आत्म विश्वास और गर्भ को प्रदर्शित करते हैं।

6) हाथी को बुद्ध का अवतार माना जाता है, क्योंकि इनकी माता ने एक बार सपना देखा था की, एक सफेद हाथी उनके गर्भ में प्रवेश किया है।

7) बेल बुद्ध की राशि वृषभ का प्रतीक है। एवं घोड़ा उस घोड़े का प्रतीक है जिस पर बैठ कर वे जीवन का सार ढूंढने के लिए घर से निकल पड़े थे। और सिंह आत्मज्ञान की प्राप्ति का प्रतीक होती है।

8) सत्यमेव जयते शब्द अबेकस के नीचे देवनागरी लिपि में लिखा गया है। यह शब्द मुंड उपनिषद से लिए गए हैं, जिसका अर्थ होता है “सत्य की विजय होती है”।

9) सारनाथ के सिंह स्तंभ जैसी संरचना थाईलैंड में भी मिली थी।

10) इस राष्ट्रीय प्रतीक का प्रयोग से शासकीय प्रयोजनों में किया जाता है। क्योंकि इसमें सर्वोच्च सम्मान और निष्ठा निहित है।

11) सारनाथ के सिंह स्तंभ का प्रयोग विभिन्न सरकारी पत्रों पर किया जाता है। और यह भारतीय मुद्रा पर भी मुद्रित होता है।

12) अशोक चक्र भारतीय राष्ट्रीय झंडे का हिस्सा है।

National Emblem of India in Hindi

प्रतीक चिन्ह के अलावा भी भारतीय गणराज्य में और भी बहुत से अधिकारिक राष्ट्रीय प्रतीक होती है। जिनमें ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट, ध्वज, राष्ट्रीय चिन्ह, भजन, यादगार इमारतें, और बहुत से देश भक्त भी शामिल है।

इन सभी प्रतीकों का भारतीय इतिहास में बहुत महत्व रहा है। भारत के ध्वज के डिजाइन को निर्वाचित एसेंबली ने आजादी के कुछ समय पहले 22 जुलाई 1947 को ही स्वीकृत किया था ! इसके अलावा भी भारत में दूसरे बहुत सारे और भी राष्ट्रीय प्रतीक होते हैं जिनमें राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय पक्षी, राष्ट्रीय फूल, राष्ट्रीय फल, और राष्ट्रीय पेड़ भी शामिल है।

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Soil Pollution in Hindi – मृदा प्रदूषण पर निबंध

Soil Pollution in Hindi

मृदा यानी मिट्टी, प्रदूषण जो मानव निर्मित उद्योगिक कचरे, कृषि रसायन, और घरों, कारखानों आदि अवशिष्ट एवं अन्य हानिकारक पदार्थ अप्रत्यक्ष रूप से प्राकृतिक रूप में मिट्टी से मिलकर मिट्टी को दूषित करते हैं। जिस कारण भूमि के उर्वरता को कम करने का मुख्य कारण बनता है और इससे फसल के लिए बी अयोग्य बनाता है।

Soil Pollution in Hindi

हम सभी वायु में सांस लेते हैं और जल को पीते हैं, किंतु मिट्टी ही एक ऐसा साधन है जिससे हमें सभी प्रकार के भोजन प्राप्त होता है। मिट्टी की ऊपरी सतह ही उर्वरता की खान है, जिस कारण फसल उत्पन्न होती है।

मिट्टी की यह उर्वरता उस में पाए जाने वाले कोटि-कोटि सूक्ष्म जीवो के कारण है , जो मिट्टी के बनते उसकी संरचना तथा उसकी उर्वरता में सक्रिय हाथ बटाते है। यदि सूक्ष्मजीव ना होती तो भूमि सर्वथा बंजर होती और फसल के नाम पर कुछ भी ना हुआ होता।

भूमि ब्रह्मांड की एक स्थाई इकाई है। इसी भूमि के रसायनिक या भौतिक तत्व में परिवर्तन होना ही भूमि प्रदूषण का मुख्य कारण माना गया है। भूमि का लगभग 50 प्रतिशत भाग प्रयोग के लायक है। एवं बाकी के 50 प्रतिशत भूमि भाग पर पर्वत एवं खाई आदि विराजमान है। आज के आधुनिक युग में प्रगति करने के लिए मनुष्य अपनी गतिविधियों से भूमि को निरंतर दूषित करता जा रहा है। जो भविष्य में मनुष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

Soil Pollution in Hindi

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Essay on Land Pollution in Hindi in 300 Words

पृथ्वी पर एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन मिट्टी ही है। जो प्रत्यक्ष रूप से वनस्पतियों और धरती पर मानव जाति तथा पशुओं को अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करती है। उपजाऊ मिट्टी वह मिट्टी है जो फसलों को बढ़ने में मदद करती है। वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो मनुष्य और प्राकृतिक प्रक्रियाओके विभिन्न कार्य के द्वारा कम गुणवत्ता की मिट्टी को प्रदूषित मिट्टी कहा जाता है। जो फसल उत्पादन के लिए मिट्टी को अयोग बना देता है। बढ़ती हुई मानव जनसंख्या और इंसानी जीवन में उन्नति बड़े स्तर पर भूमि प्रदूषण का कारण बनता जा रहा है।

अत्यधिक भूमि अपरदन, जंगलों को जलाना, फसल उत्पादन में सुधार के लिए रसायनिक खादों का प्रयोग, कीटनाशक, कीटों के ऊपर नियंत्रण करने के लिए बायो साइट, ( मेलाथियान, डी डी टी, एंड्राइड, ड्रिलड्राइं न, एल्ड्रिन, लीनडन) चेरी और औद्योगिक कचरा, नीस्खलन, वनोन्मूलन, सुखा, औषधि औद्योगिक जल सिंचाई, जल सं लेखन, औद्योगिक सिंचाई, आदि ही भूमि प्रदूषण का मुख्य कारण है। यह देश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में दिनोंदिन बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है। रसायनों के माध्यम से ही मिट्टी में ओबानचनिया बाहरी तत्वों के भारी परिमाण की उपलब्धता के कारण मृदा यानी भूमि प्रदूषण मिट्टी के पोषकता को कमजोर कर रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, यह ध्यान देना यज्ञ है कि फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए 1999 से 2000 तक 18.07 मिलियन टर्न एवं 1980 से 81 तक 5.5 मिलियन टर्न रसायनिक खादों का उपयोग किसानों द्वारा किया गया है। ऐसे ही जहरीले रसायन खाद्य के द्वारा मानव शरीर में शारीरिक गड़बड़ी का कारण बनता जा रहा है ! एवं नए जन्म लिए बच्चों में शारीरिक गड़बड़ी के साथ तांत्रिक ट्यूब के कमी होने के द्वारा बहुत ज्यादा नुकसान भी पहुंचाते हैं ! इसी कारण हमें मिट्टी की उर्वरता को बरकरार रखने और इसको सुरक्षित रखने के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता बहुत ही जरूरी है ! जिस कारण आने वाली पीढ़ी एवं विभिन्न प्रकार के जीव जंतु जीवित रह सके।

Essay on Land Pollution in Hindi in 500 Words

भूमि प्रदूषण यानी ताजा और उपजाऊ मिट्टी का प्रदूषण है, जो उस में पनपने वाली फसलों, पौधों, जानवरों, मनुष्य और अन्य जीवो के स्वस्थ पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। आवंचित पदार्थ एवं कई प्रकार के स्रोतों से विषाक्त रसायनों के प्रकार अलग- अलग अनुपात में मिलकर पूरी भूमि के प्रदूषण के कारण बन जाता है। एक बार यदि प्रदूषक मिट्टी में मिश्रित हो जाता है तो वह लंबे समय तक मिट्टी के साथ सीधे संपर्क में रहता है। उपजाऊ भूमि में औद्योगिकीकरण और विभिन्न प्रभावी उर्वरकों की बढ़ती खपत से लगातार धरती की मिट्टी संरचना और उसका रंग बदल रहा है। जो कि पृथ्वी पर जितने भी जीवन है वह भविष्य के लिए बहुत ही खतरनाक संकेत दे रहा है।

उद्योगों और घरेलू संक्री लो द्वारा जारी किए जाने वाले विषाक्त पदार्थ के मिश्रण के माध्यम से पृथ्वी पर सारी उपजाऊ जमीन धीरे धीरे प्रदूषित हो रही है। भूमि प्रदूषण के प्रमुख स्रोत है औद्योगिक अवशिष्ट, सहरी अवशिष्ट, रासायनिक प्रदूषक, धातु प्रदूषण, जैविक एजेंट्स, रेडियोधर्मी प्रदूषण, एवं गलत कृषि पद्धतियां आदि है। औद्योगिक प्रक्रिया द्वारा जारी आज योगी कचरे में कार्बनिक, अकार्बनिक, ओ  बायोडिग्रेडेबल सामग्र होती है, जिनमें मिट्टी की भौतिक जैविक क्षमता ए बदलने की ताकत होती है। यह पूरी तरह से मिट्टी की बनावट और खनिज बैक्टीरिया और फंगस कालोनियों के स्तर को बदल कर रख देता है।

शहरी अपशिष्ट पदार्थ ठोस अवशिष्ट पदार्थ होते हैं जिनमें वाणिज्यिक और घरेलू कचरे शामिल होते हैं , जो मिट्टी पर भारी ढेर बनाते हैं और मृदा प्रदूषण को बढ़ावा देने में मदद करता है। रासायनिक प्रदूषक और धातु प्रदूषक , कपरा, साबुन, रंजक, सिंथेटिक, डिटर्जेंट, धातु और ड्रग्स उद्योगो से औद्योगिक अवशिष्ट मिट्टी और पानी में लगातार अपने खतरनाक कचरे को डंप कर रहा है। एवं यसीधे मिट्टी के जीवो को प्रभावित करता है। और मिट्टी के प्रजनन स्तर को कम करता है। जैविक प्रोजेक्ट जैसे कि बैक्टीरिया, शैवाल, कवक, प्रोटोजोआ, और नीमेंरोड्स, मिली पैड, केंचुए, आदि जैसे सूक्ष्मजीव मिट्टी के भौतिक रसायनिक तथा जैविक वातावरण को प्रभावित करते हैं, और मृदा प्रदूषण का कारण बनता है।

परमाणु रिएक्टरों, विस्फोट, अस्पतालों, वैज्ञानिक प्रयोगशाला ओ, जैसी आदि स्रोतों से भी कुछ रेडियोधर्मी प्रदूषक मिट्टी में घुस जाते हैं, और लंबे समय तक वहां रहकर भूमि प्रदूषण का कारण बनता है। भूमि प्रदूषण के स्रोत नगरपालिका के कचरे का ढेर, खाद्य प्रसंस्करण अवशिष्ट, खनन प्रथा आदि भी है। भूमि प्रदूषण स्वस्थ के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हुई है। क्योंकि विषाक्त रसायन शरीर में जाकर खाद्य श्रृंखला के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं एवं पूरे आंतरिक शरीर प्रणाली को परेशान करता रहता है। भूमि प्रदूषण को कम करने और प्रतिबंधित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण कानूनों के सहित सभी प्रभावी नियंत्रण उपायों का अनुसरण लोगों के द्वारा विशेष रूप से उद्योगपति द्वारा किया जाना चाहिए। ठोस अपशिष्ट को रीसाइक्लिंग एवं पुनः उपयोग करनी चाहिए। और लोगों के बीच जहां तक हो सके वृक्ष रोपण को बढ़ावा देनी चाहिए। इसके द्वारा ही उत्पन्न प्रदूषण धीरे- धीरे कम हो सकता है।

Causes of Soil Pollution in Hindi

1) भूमि पर औद्योगिक एवं कारखाने आदि के अवशिष्ट पदार्थ से ही भूमि को प्रदूषित बनाया जाता है।

2) कृषि के लिए कीटनाशक और उर्वरकों के उपयोग में वृद्धि होने से भी मिट्टी के विषाक्तता बढ़ जाती है।

3) जानवरों एवं मनुष्य द्वारा खुले में मल त्याग करना भी भूमि प्रदूषण का कारण है।

4) एसिड बारिश भी सामान्य मिट्टी को पी एच (ph) के मात्रा को बढ़ा देता है। और प्राकृतिक मिट्टी को अम्लीय में बदल देती है।

5) जल में salinization के कारण मिट्टी में मिलकर घुलनशील नमक बढ़ाता है और इस वजह से मिट्टी विषैला बन जाता है।

6) मृदा अपरदन, सिरसा मिट्टी के नुकसान का कारण बनता है। यह मिट्टी को कम उपजाऊ बनाते हैं और जल की क्षमता को भी कम कर देता है।

Soil Pollution Effects in Hindi

1) मानव स्वस्थ पर प्रभाव डालता है।

2) मिट्टी की उत्पादकता कम कर देता है।

3) भू जल को प्रदूषित करता है।

4) सूक्ष्मजीव द्वारा कार्बनिक पदार्थ का उत्पादन अप्रिय गंद को पैदा करता है।

5) रेडियोधर्मी आइसोटोप शरीर के अवश्य किय तत्वों की जगह ले लेती है। एवं स्वस्थ असामान्य ता का कारण भी बनता है।

Control of Soil Pollution in Hindi

1) मिट्टी में अवशिष्ट निर्वाहन करने से पहले उसका उपचार करना चाहिए।

2) ठोस कचरे को उचित तरीके से एकत्रित क्या जाना चाहिए।

3) कचरे से उपयोगी उत्पादों को संग्रह कर लेनी चाहिए।

4) मवेशियों के गोबर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

5) उर्वरक और कीटनाशकों का कम से कम उपयोग करना चाहिए  आदि

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Essay on Rabbit in Hindi Language – खरगोश के बारे में रोचक तथ्य

Essay on Rabbit in Hindi Language

खरगोश छोटा सा स्तनपाई जीव है, यह छोटा सा जानवर संसार के हर जगह में पाया जाता है। कहीं ज्यादा तो कहीं कम संख्या में। देखा जाए तो खरगोश ज्यादातर जंगलों, खेतों, एवं घास के मैदानों में रहना पसंद करते हैं। और यह जिब ज्यादातर जमीन में खड्डा बनाकर रहते हैं। इसी कारण इसे धरती पर रहने वाला जीब भी कहां जाता है।

इसकी बहुत सी प्रजातियां पाई जाती है। यह सफेद काले और भूरे रंग में पाया जाता है। इसकी आंखें गोल और बड़ी होती है। इसके दो बड़े दांत बाहर निकले हुए होते हैं। और इसके कान भी बहुत बड़े होते हैं।

Essay on Rabbit in Hindi Language

खरगोश स्वाभाव से बहुत चंचल प्रजाति के जीव होता है। और इस का स्वाभाव हर समय चंचल रहता है ! इश्क शरीर के बाल बहुत ही मुलायम होती है एवं इसके एक छोटी सी पूछ भी होती है। रिसर्च के द्वारा देखा गया है कि खरगोश की औसतन आयु 10 वर्ष के होते हैं। लेकिन शिकारियों के वजह से ये ज्यादा से ज्यादा 1 साल तक जी पाता है।

मादा खरगोश एक समय में 9 से लेकर 12 बच्चों को जन्म दे देती है, एवं 15 दिन तक अपने बच्चों को दूध पिलाने के बाद मादा खरगोश पून: नर खरगोश से प्रजनन के लिए तैयार हो जाती है। मादा खरगोश के द्वारा यह कर्म 5 वर्ष तक चलता रहता है।

खरगोश के काण लगभग 10 सेंटीमीटर तक लंबे होते हैं। एवं इसका वजन 2 किलोग्राम तक होता है ! खरगोश के चार पैर होते हैं। इसके 28 दांत होते हैं जो कि पूरे जीवन बढ़ते ही रहते हैं। खरगोश में अंगोरा नाम की ऊन प्राप्त होती है। खरगोश 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ते हैं। एवं इनकी सुनने की शक्ति बहुत अधिक होती है।

उनका दिल बहुत तेजी से धड़कता है, वैसे तो खरगोश पूरे विश्व में पाए जाने वाले जीव है, लेकिन यह मुख्य रूप में दक्षिण अमेरिका में ज्यादा पाए जाते हैं। खरगोश शाकाहारी जीव होते हैं। यह अनाज और फल खाते हैं और खाने में इन्हें सबसे ज्यादा गाजर पसंद होता है।

Essay on Rabbit in Hindi Language

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Information About Rabbit in Hindi

खरगोश को किसी भी चीज को इधर उधर होना बिल्कुल भी पसंद नहीं होता है। इसीलिए यह अपने दिमाग में हर जगह का नक्शा बना लेते हैं। खरगोश की याददाश्त बहुत ही कमाल की होती है। खरगोश जब पैदा होता है तो इसके शरीर पर बाल नहीं होते हैं लेकिन बाद में उग आते हैं। हर 2 साल बाद इनके बाल झड़ जाते हैं। और उसी स्थान पर दोबारा बाल आ जाते हैं। खरगोश हर पल चौकन्ना और चुस्त रहते हैं। इसीलिए इन्हें हल्की सी आहट का भी पता लग जाता है।

खरगोश एक दूसरे की सहायता भी करती है। इन जीवो को बड़े पैमाने में पालन भी किया जाता है। कुछ लोग उनके मांस को खाते हैं, और कुछ लोग खरगोश को घर में पालतू जानवर बना कर भी रखते हैं। जन्म के 11 दिन तक खरगोश के बच्चे चल नहीं पाते ! लेकिन 14-15 दिन में वह खुद से खाना पीना भी सीख जाते हैं ! खरगोश को बच्चे बहुत ही पसंद करते हैं।

Information About Rabbit in Hindi

1) खरगोश बहुत छोटे एवं प्यारे जानवर है।

2) खरगोश के चार पैर होते हैं।

3) यह एक शाकाहारी जीव है, एवं इस का पसंदीदा भोजन गाजर है।

4) इसके बड़े बड़े कान और बड़ी बड़ी गोल आंखें होती है।

5) इसके एक पूछ होती है जिससे बॉब (BOB) कहा जाता है।

6) विश्व मे सबसे अधिक खरगोश दक्षिण अमेरिका में पाए जाते हैं।

7) नर खरगोश को बाक ( buck) वह मादा खरगोश को Doe कहा जाता है।

8) विश्व के सबसे बड़े खरगोश का नाम डेरियस ( darius ) है जो UK मैं रहता है।

9) खरगोश बहुत ही सामाजिक प्यार और इंटरएक्टिव प्राणी है, और बड़े घरों में रहते हैं , जिन्हें कालोनियों या झुंड को एक घर में बुलाया जाता है जिससे बारन कहा जाता है।

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Importance of Trees in Hindi – वृक्ष का महत्व पर निबंध

Importance of Trees in Hindi

जैसे कि हमें पता ही है कि पूरे ब्रह्मांड में अब तक खोजे गए ग्रहों में से पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है, जहां जीवन रूपी पेड़ और पौधों को पाया जाता है। वृक्ष जीवन के स्तंभ होते हैं। पृथ्वी पर जीवित रहने के लिए हवा और पानी जैसे जरूरी तत्व का अति आवश्यक होता है, जो हमें पेड़ के द्वारा ही प्राप्त होता है।

पेड़ के बिना धरती पर जीवन नामुमकिन है। पेड़ के प्रत्येक हिस्सा जीवो को कुछ ना कुछ जरूर देता है। इसका तना, पत्तियां, फूल, फल, जड़ इत्यादि सब मनुष्य जाति के लिए उपयोगी होते हैं। वृक्ष बंदर, तोता, गोरेया, जैसे जीवो का आवास स्थान भी है। मनुष्य जीवन के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति भी वृक्ष ही करता है।

Importance of Trees in Hindi Language (About Trees in Hindi)

आज लगाया गया पौधा कल वृक्ष बनता है जो आने वाली पीढ़ियों को फायदा देता है। पैरों के द्वारा हमें हवा, पानी, भोजन, लकड़ी, चारा जैसी बहुमूल्य चीजें प्राप्त होती है। लकड़ी के रूप में इंधन पेड़-पौधे ही देते हैं। जीवो के द्वारा छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करके पेड़ पौधे प्राणवायु ऑक्सीजन को छोड़ते हैं। यह हमें इतना कुछ दे कर भी बदले में हमसे कुछ भी नहीं लेते हैं। फिर भी मनुष्य लालच में आकर इनको काट देता है। इस प्रकार के व्यक्ति को हमें रोकना चाहिए। एवं उसके बदले में प्रत्येक मनुष्य को एक पेड़ लगाना चाहिए, और उसकी देखभाल करनी चाहिए।

धर्म शास्त्रों में वृक्षारोपण को पुण्य दाई कार्य बनाया गया है। इसका कारण यह है कि वृक्ष धरती पर जीवन के लिए बहुत ही आवश्यक है। हम देख सकते हैं कि भारतवर्ष में आदि काल से ही लोग तुलसी, पीपल, केला, बरगद, आदि पेड़ पौधों को पूजते आए हैं। आज विज्ञान सिद्ध कर चुका है कि यह पेड़ पौधे हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।

वृक्ष पृथ्वी को हरा भरा बनाकर रखता है। जिन स्थानों में पेड़ पौधे पर्याप्त संख्या में होते हैं वहां निवास करना भी आनंददाई प्रतीत होती है। इसके अलावा भी पेड़ छाया प्रदान करती है। इनकी ठंडी छाया में मनुष्य एवं पशु विश्राम कर आनंदित होते हैं। यह यात्रियों को सुखद छाया उपलब्ध कराते हैं। ऋषि मुनि भी वनों में रहकर अपने जीवन यापन की सभी आवश्यक वस्तुएं पैरों से ही प्राप्त कर लेते थे।

जैसे-जैसे सभ्यता बड़ी, लोग पैरों को काट कर उनकी लकड़ी से घर के फर्नीचर बनाने लगे, उद्योगों का विकास हुआ तो कागज, दियासलाई, रेल के डिब्बे आदि बनाने के लिए लोगों ने जंगलों को साफ कर दिए। जिस कारण जीवन उपयोगी वस्तुओं का अकाल पढ़ने लगा। साथ ही साथ पृथ्वी की हरीतिमा भी घटने लगी।

Importance of Trees in Hindi

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Essay on Importance of Trees in Hindi

पेड़ की अत्याधिक कटाई को रोकने के लिए जन जागरूकता की आवश्यकता है। आमजन में पैड़ को बचाने के लिए संदेश जाना चाहिए। लोगों को ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना चाहिए, पैड़ के महत्व को स्कूली शिक्षा में भी शामिल करना चाहिए, जिससे बच्चों में वृक्ष के प्रति जागरूकता बड़े, पैड़ की अतिरिक्त कटाई पर कानून लाना भी जरूरी है। बिना किसी ठोस वजह के अतिरिक्त पैर को काटना नहीं चाहिए। अगर फिर भी पेड़ काटना पड़े तो उसके बदले में दो पेड़ और लगाने चाहिए।

वृक्षों का संरक्षण जरूरी है। इसीलिए पेड़ लगाइए और पुण्य कमाइए। हरी-भरी खुशहाल जीवन से भरी धरती पेड़ पौधों पर ही निर्भर है। वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना असंभव है। इसीलिए पेड़ की कटाई पर रोक लगाना अनिवार्य है।

10 Lines on Importance of Trees in Hindi

1) पेड़ हमें फल देते हैं, आम, अनार, अंगूर, पपीता, सेब जैसे गुणकारी फल पेड़ पौधे से ही प्राप्त होते हैं, इसके अलावा भी गेहूं दाल जैसे अनाजों को कृषि करके पौधों से ही प्राप्त किया जाता है।

2) पेड़ पौधों पर फूल भी लगते हैं जो धरती पर मनमोहक छटा बिखेरते हैं , जैसे गुलाब, कमल, गेंदा, आदि आकर्षित फूल मन को मोह लेते हैं।

3) पेड़ पौधों को विश्व में कई जगह पर पूजा भी जाता है, खासकर भारत में पीपल, तुलसी जैसे पेड़ पौधों को पवित्र मानकर पूजा जाता है। कई प्रकार के पेड़ पौधों औषधि में भी उपयोग किए जाते हैं। नीम तुलसी आमला जैसे पौधे औषधि के रूप में काफी उपयोग किए जाते हैं।

4) पेड़ पौधों मृदा अपरदन को रोकते हैं। मिट्टी के कटाव को कम करते हैं। पेड़ पौधे तपती गर्मी में धूप को रोककर छांव देते हैं। जीव जंतु पैड़ की छांव में ही आराम करते हैं।

5) वृक्षों के द्वारा ही धरती पर वर्षा होती है। जिससे कृषि और घरेलू कार्य के लिए पानी का इंतजाम होता है।

6) पेड़ वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण को कम करके जीवो पर उपकार करते हैं। पेड़ पौधे लकड़ी भी प्रदान करते हैं, पेड़ों से प्राप्त लकड़ी से कई प्रकार के सामग्री बनाया जाता है। इंधन के लिए लकड़ी भी पेड़ों से ही प्राप्त होती है।

Hindi Essay on Importance of Trees in Our Life

1) पेड़ पौधों की अत्याधिक कटाई के पीछे का कारण जनसंख्या में अधिक बढ़ोतरी को माना जाता है। पेड़ों की घटती संख्या में प्रकृति का संतुलन गड़बड़ाने लग गया है। जीवो की कई प्रजातियां पैरों पर ही निर्भर होते हैं पक्षी पैरों पर ही अपना घोंसला बनाते हैं, उनका आवास पेड़ों तक ही सीमित रहता है। जीवो का यह आवास धीरे धीरे खत्म हो रहा है जिससे कई प्रजातियां विलुप्त होती जा रही है।

2) वृक्ष की कमी से वातावरण में दूषित गैस में बढ़ोतरी होती जा रही है। वायु प्रदूषण भी इसी के कारण ही होता है।

3) वृक्ष नहीं होने से मिट्टी का कटाव अत्याधिक होता है जिसमें बाढ़ आने का खतरा बढ़ जाता है ! सूखा पड़ना या अकाल आना भी काफी हद तक पेड़ों पर ही निर्भर करता है। क्योंकि पेड़ ही वर्षा के कारण होते हैं।

4) मिट्टी उपजाऊ नहीं रहती है क्योंकि मिट्टी में मिलने वाली पैरों की पेत्तियां और लकड़ी मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है। कम पेड़ होने से मिट्टी की उर्वरता कम होती जा रही है। रेगिस्तान की सीमा में इजाफा हो रहा है, यह एक बड़ी ही चिंता का विषय है।

5) पेड़ पौधों की अतिरिक्त कटाई से पृथ्वी पर ग्लोबल वार्मिंग की समस्या भी उत्पन्न हो गई है। पृथ्वी के तापमान में अत्यधिक बढ़ोतरी हुई है जिससे कई बड़े ग्लेशियर पिघलने लगे हैं। महासागरों के जल में भी बढ़ोतरी हुई है, ओजोन परत को भी काफी नुकसान हुआ है।

इसी कारण हमें पेड़ को बचाना चाहिए और वनों की कटाई को रोकना चाहिए, पेड़ बचाओ पेड़ लगाओ जीवन को स्वस्थ बनाओ, यही धर्म सभी को पालन करना चाहिए।

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धन्यवाद –